|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन ने विकास के रिकॉर्ड तोड़े
पिछले वर्ष चीन की अर्थव्यवस्था नौ प्रतिशत से भी अधिक की दर से बढ़ी है. यह पिछले छह वर्षों में चीन में अब तक का सबसे तेज़ विकास है, पिछले वर्ष के आख़िरी तीन महीनों में तो विकास दर लगभग दस प्रतिशत तक जा पहुँची. चीन में विकास की तेज़ गति का श्रेय व्यापार, विदेशी निवेश और उपभोक्ता बाज़ार को दिया जा रहा है. चीन की सरकार ने वर्ष 2004 के लिए सात प्रतिशत विकास दर की भविष्यवाणी की है. कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीनी अर्थव्यवस्था इससे आगे निकल सकती है. चीन की यह विकास दर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ है और उसने जापान और अमरीका को विकास की गति के मामले में पीछे छोड़ दिया है. वैसे इसका मतलब सिर्फ़ यही है कि चीन की विकास की गति तेज़ है क्योंकि वहाँ विकास की गुंजाइश है जबकि अमरीका और जापान जैसे देश अब विकासशील नहीं रह गए हैं. यह भी स्पष्ट हो गया है कि सार्स रोग फैलने के बावजूद दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पटरी से नहीं उतरी है. चीन में विदेशी निवेश पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है, अब से दो वर्ष पहले चीन ने विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता ली और उसके बाद यह गति और तेज़ हुई है. वर्ष 2003 में चीन का औद्योगिक विकास 17 प्रतिशत की दर से हुआ जबकि उपभोक्ता सामानों की बिक्री में नौ प्रतिशत की वृद्धि हुई. चीन की इस तेज़ विकास दर ने अर्थशास्त्रियों को चौंकाया नहीं है क्योंकि वहाँ पिछले कुछ वर्षों से तेज़ गति से विकास हो रहा है और उदारीकरण की प्रक्रिया ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||