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चीन-अमरीका व्यापारिक मतभेद बढ़े
चीन ने अमरीका के उसके यहाँ तैयार कुछ वस्त्रों के आयात को सीमित किए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है. चीन का कहना है कि उसने इस मामले में बुधवार को अमरीकी राजदूत को बुला कर अपना विरोध व्यक्त किया. अमरीका ने चीन से आयात होने वाले महिलाओं के अंदर पहनने वाले कपड़ों, यानी ब्रा और पैंटी और कुछ अन्य वस्त्रों का कोटा निर्धारित कर दिया है. सरकारी समाचार पत्र चाइना डेली ने बुश प्रशासन पर आरोप लगाया है कि 'वो अगले साल होनेवाले राष्ट्रपति चुनावों से पहले अमरीकी वस्त्र उद्योग को लुभाने के लिए घटिया राजनीति खेल रहा है.' अख़बार का कहना है कि चीन का ये निर्णय अमरीकी उपभोक्ताओं को महँगा साबित होगा. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हालाँकि दोनों देशों के बीच वस्त्र कारोबार का ये एक महज एक छोटा-सा हिस्सा भर है लेकिन ये चीन के साथ अमरीका के बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर उत्पन्न तनाव को दिखाता है. उधर, अमरीकी वस्त्र उद्योग का कहना है कि चीन के आयात के कारण पिछले दो साल में वस्त्र उद्योग से जुड़े लगभग तीन लाख लोगों ने नौकरी खो दी थी. असर व्यापार में चीन अमरीका का सबसे बड़े भागीदारों में से एक है.
पिछले एक साल में चीन के अमरीका को वस्त्र निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए चीन सरकार की सब्सिडी की नीति ज़िम्मेदार है. अमरीका ने चीन से अमरीका को होने वाले कपड़ों के निर्यात पर जो कोटा नियंत्रण लागू किये हैं उसका सबसे बड़ा असर तो अमरीका में ही दिखाई दे रहा है. मुद्रा बाज़ार में डॉलर पर दबाव बढ़ गया है क्योंकि बाज़ार में यह चिंता फैल रही है कि अमरीका संरक्षणवादी व्यापार नीति की और बढ़ रहा है. इसकी वजह वोट खींचने की राजनीति हो सकती है क्योंकि प्रभावशाली उद्योग समूह पूरी कोशिश करेंगे कि उन्हें ज्यादा रियायतें मिलें ताकि अमरीका में विदेशी माल की बढ़ती खपत को कम किया जा सके. लेकिन इसका नतीजा यह रहा कि बुधवार को डॉलर यूरो के मुक़ाबले अब तक की सबसे कम कीमत पर पहुँच गया. हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार आया. तनाव अमरीका और चीन के बीच व्यापार को लेकर संबंध तनावपूर्ण होते जा रहे हैं. चीन को डर है कि अमरीका में राष्ट्रपति चुनावों तक ये तनाव और बढ़ सकता है. दरअसल, इस साल के अंत तक चीन के साथ अमरीका का व्यापार घाटा 120 अरब डॉलर का हो जाएगा. अमरीका में इसको लेकर भारी चिंता है. अमरीका की ओर ऐसी भी धमकी दी जा रही थी कि यदि चीन अपनी मुद्रा की विनिमय दर फिर से निर्धारित नहीं करता है तो उसके उत्पादों के आयात पर भारी शुल्क लगाने के लिए विधेयक लाया जा सकता है. अमरीकी डॉलर की तुलना में चीनी मुद्रा की दर इतनी कम है कि चीनी उत्पाद बेहद सस्ते होते हैं. |
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