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सैनिकों की संख्या में कटौती शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने जम्मू-कश्मीर में बुधवार से अपने सैनिकों की संख्या कम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कश्मीर यात्रा के दिन से यह क़दम उठाया गया है, वे प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार कश्मीर का दौरा कर रहे हैं. मंगलवार को उनकी यात्रा से ठीक एक दिन पहले कश्मीर में संदिग्ध चरमपंथियों ने दो अलग-अलग घटनाओं में छह लोगों को मार डाला. श्रीनगर में सुरक्षा बलों के एक प्रवक्ता ने बताया कि सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया दक्षिणी अनंतनाग ज़िले से शुरू होगी. अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारत कितने सैनिकों को हटाने की योजना बना रहा है. लेफ्टिनेंट जनरल निर्भय शर्मा ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि सेना अपनी सतर्कता में कॉई कमी नहीं करेगी. लेकिन उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि नियंत्रण रेखा से भी सैनिक हटाए जाएँगे या नहीं. पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत कश्मीर में अपने सैनिकों की संख्या में कमी कर रहा है क्योंकि वहाँ चरमपंथी हिंसा में कमी दिखाई दे रही है. हमले मंगलवार के हमले में भारत समर्थक बन चुके एक चरमपंथी फारूक़ अहमद और चार अन्य लोगों की बड़गाम ज़िले में गोली मारकर हत्या कर दी गई.
एक अन्य घटना में चरमपंथियों ने भारत का समर्थन करने वाले एक पूर्व चरमपंथी की बेटी को गोली मार दी. कश्मीर में ऐसे लोग बड़ी तादाद में हैं जो अलगाववाद का रास्ता छोड़कर अब भारतीय सुरक्षा बलों की मदद करते हैं और चरमपंथियों के शिकार बनते हैं. प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता मीर वाइज़ उमर फ़ारूक़ ने कहा है कि उन्हें किसी आर्थिक पैकेज की घोषणा करने के बदले गंभीर राजनीतिक पहल करनी चाहिए. उन्होंने कहा, "हम चाहेंगे कि प्रधानमंत्री के राजनीतिक पैकेज में कैदियों की रिहाई और मानवाधिकार हनन पर रोक जैसे क़दम शामिल हों." संभावना व्यक्त की जा रही है कि सैनिकों को हटाने के भारत के फ़ैसले का सकारात्मक असर पाकिस्तान के साथ चल रही बातचीत की प्रक्रिया पर भी पड़ेगा. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ अगले सप्ताह भारत की यात्रा पर पहुँच रहे हैं. |
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