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'भारत के सामने प्रस्ताव रखने को राज़ी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा है कि पाकिस्तान औपचारिक रूप से भारत के सामने वह प्रस्ताव रखने को तैयार है जिस बारे में पिछले दिनों राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने बयान दिया था. पिछले महीने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने भारत के साथ कश्मीर मसले पर चल रहे विवाद को हल करने के लिए एक नए फ़ॉर्मूले की पेशकश की थी. इसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा था कि अगर पाकिस्तान औपचारिक रूप से भारत के सामने यह प्रस्ताव रखेगा तो भारत इस पर ज़रूर विचार करेगा. नटवर सिंह के बयान पर बीबीसी हिंदी के साथ विशेष बातचीत में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी ने कहा, "राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने इस प्रस्ताव पर बहस शुरू की है. आपको इस पर कोई संदेह नहीं रखना चाहिए. जह हम बैठक में जाएँगे, तो प्रस्ताव लेकर जाएँगे." कसूरी ने कहा कि उन्हें भारत से भी यही उम्मीद है कि वह भी खुले दिल से सामने आएगा और दोनों देश ऐसा हल निकालेंगे जो तारीख़ में याद रखा जाएगा. पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले एक साल के दौरान दोनों देशों ने बहुत मेहनत की है और अब ये कोशिश होनी चाहिए कि हम इससे पीछे न हट जाएँ. कसूरी ने कहा, "राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से यह कहा है कि हल ऐसा निकले जो दोनों देशों को मंज़ूर हो. साथ में कश्मीरियों को भी यह हल मंज़ूर होना चाहिए क्योंकि अगर कश्मीरी ही हल को नहीं मानेंगे तो बात कैसे बनेगी." पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भारतीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल के उस बयान का स्वागत किया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत कश्मीरी अलगाववादियों के पाकिस्तान जाने पर लचीला रुख़ अपनाने को तैयार है. बातचीत कसूरी ने कहा कि प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ साहब भारत के दौरे पर जा रहे हैं. उसके बाद विदेश सचिव स्तर की बातचीत होनी है. उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री नटवर सिंह को पाकिस्तान आने का निमंत्रण दिया गया है और ढाका में भी दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच मुलाक़ात होगी. कसूरी ने कश्मीर में सैनिकों की संख्या में कमी के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का भी स्वागत किया. उन्होंने कहा कि कश्मीर मामले पर दोनों देशों के बीच ऐसे स्तर पर भी बातचीत चल रही है जिसके बारे में मीडिया को नहीं बताया जाता. उन्होंने कहा कि यह ट्रैक-2 कूटनीति नहीं है क्योंकि ऐसी बातचीत भी आधिकारिक स्तर पर होती है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के तारिक अज़ीज़ और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेएन दीक्षित के बीच भी अच्छी बातचीत चल रही है. मुशर्रफ़ का प्रस्ताव पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पिछले महीने कश्मीर में संयुक्त शासन का सुझाव दिया है.
अपने फ़ॉर्मूले में उन्होंने कहा था कि कश्मीर में जनमतसंग्रह कराने की अभी तक चली आ रही पाकिस्तान की माँग व्यावहारिक नहीं है और भारत नियंत्रण सीमा रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा बना देने की जो माँग करता है, वह स्वीकार्य नहीं है. परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीर का पुनर्गठन करने और वहाँ संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को और बढ़ाने का सुझाव भी रखा. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर में सात अलग-अलग भाषाई, भौगोलिक और धार्मिक इकाइयाँ हैं. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को यह तय करना है कि कौन सी इकाई किसके पास रहनी चाहिए और किसे स्वायत्त घोषित कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि स्वायत्त हिस्से को संयुक्त राष्ट्र के अधीन या फिर दोनों देशों की संयुक्त निगरानी में रखा जा सकता है. |
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