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हुर्रियत ने कहा पाकिस्तानी दबाव नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय कश्मीर के अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने इन आरोपों से इनकार किया है कि उन पर पाकिस्तान की ओर से कोई दबाव है. भारत के गृह मंत्रालय के एक बयान में कहा गया था कि पाकिस्तान हुर्रियत कॉन्फ्रेंस पर दबाव डाल रहा है कि वह बातचीत में तभी शामिल हो जब उसमें पाकिस्तान में भी हिस्सा ले, यानी त्रिपक्षीय वार्ता न होने की सूरत में वह उससे दूर रहे. हुर्रियत के अंसारी गुट के अध्यक्ष मौलवी अब्बास अंसारी ने भारत सरकार के आरोपों को निराधार बताया है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार से बातचीत की प्रक्रिया केंद्र में सरकार बदलने की वजह से बाधित हुई थी, उन्होंने ये बातें ऐसे मौक़े पर कही हैं जबकि केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल कश्मीर के दो दिन के दौरे पर वहाँ मौजूद थे. अंसारी ने कहा, "हमने कभी किसी से निर्देश नहीं लिया है, हमने भारत सरकार के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू की थी जब वाजपेयी प्रधानमंत्री थे." उन्होंने कहा कि हुर्रियत बातचीत से ही समस्या के हल में विश्वास रखती है लेकिन बातचीत अर्थपूर्ण होनी चाहिए. आरोप मौलवी अंसारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार भी "उसी तरह के हथकंडे अपना रही है जैसी पिछली कांग्रेस सरकारों ने अपनाया था."
उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकार ने परस्पर विश्वास बढ़ाने की दिशा में जिन क़दमों को उठाने का वादा किया था कांग्रेस सरकार ने उनमें से किसी वादे को पूरा नहीं किया है. अंसारी ने कहा कि इन क़दमों में क़ैदियों की रिहाई, उन्हें दूसरे राज्यों की जेलों से कश्मीर की जेल में लाना और बिना आरोप के बंद किए लोगों के ख़िलाफ़ न्यायसंगत तरीक़े से मुक़दमा चलाना शामिल था. उन्होंने कहा कि हमने कैदियों को सरकार के इन आश्वासनों के बारे में बताया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है. अंसारी ने कहा है कि हुर्रियत के नेता बातचीत के लिए पाकिस्तान जाना चाहते हैं, उन्होंने कहा कि "नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के कश्मीरियों को विश्वास में लेकर ही कोई फैसला हो सकता है. " हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का कहना रहा है कि कोई समाधान तभी निकलेगा जब सभी पक्षों को बातचीत में शामिल किया जाएगा. मौलवी अंसारी ने कहा, "हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है, यह भारत की आंतरिक समस्या नहीं है, बातचीत की प्रक्रिया में यह बात झलकनी चाहिए." |
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