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शनिवार, 27 मार्च, 2004 को 05:38 GMT तक के समाचार
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आडवाणी-हुर्रियत बातचीत जून में फिर
हुर्रियत नेता आडवाणी के साथ
बातचीत को ख़ुशगवार माहौल में बताया गया
भारत के उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और कश्मीरी अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अब्बास गुट के नेताओं के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई है.

शनिवार की इस मुलाक़ात के बाद बातचीत का अगला दौर जून में करने पर सहमति हुई है.

लालकृष्ण आडवाणी के साथ गृह सचिव अनिल बैजल इस बातचीत में मौजूद थे और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की ओर से मौलवी अब्बास अंसारी, अब्दुल ग़नी बट्ट, मीर वाइज़ उमर फ़ारूक़ और दिवंगत कश्मीरी नेता अब्दुल ग़नी लोन के बेटे बिलाल लोन ने हिस्सा लिया.

बातचीत के बाद एक बयान पढ़ते हुए बिलाल लोन ने कहा कि बातचीत बहुत ही सदभावपूर्ण, खुले और बेबाक माहौल में हुई.

"हमने 22 जनवरी को हुई बातचीत के मुद्दों पर हुई प्रगति का जायज़ा लिया."

समाचार एजेंसी एपी ने कहा है कि आडवाणी ने हुर्रियत नेताओं से संभवतः यह गुज़ारिश की है कि वे आगामी आम चुनावों का बहिष्कार ना करें.

ग़ौरतलब है कि विभिन्न अलगाववादी कश्मीरी नेताओं ने आम चुनावों के बहिष्कार की घोषणा की है जिनमें शबीर शाह, यासीन मलिक और हुर्रियत का गिलानी धड़ा शामिल है.

बातचीत शुरू करने से पहले अब्बास अंसारी ने कहा था, "हम यहाँ इसलिए आए हैं ताकि बातचीत का सिलसिला जारी रहे और मसले का हल शांतिपूर्ण तरीक़े से निकाला जाए."

आडवाणी के साथ हुर्रियत नेता
बातचीत को सकारात्मक कहा गया

भारत सरकार ने 22 जनवरी को बातचीत के पहले दौर के बाद 69 क़ैदियों को रिहा किया था और संभावना व्यक्त की जा रही है कि निकट भविष्य में कुछ और क़ैदियों को रिहा किया जाएगा.

हुर्रियत कान्फ्रेंस कम से कम 1500 क़ैदियों की रिहाई की माँग कर रही है.

आडवाणी ने भी कहा है कि जम्मू कश्मीर में तैनात सैनिकों और अर्द्धसैनिक बलों को मानवाधिकारों का सम्मान करने के मामले में पूरी एहतियात बरतने के आदेश दिए गए हैं.

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की लंबे समय से यह माँग रही है कि कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन बंद हो.

आशंका

जनवरी में शुरु हुई बातचीत के बाद भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर की घटनाओं से यह आशंका पैदा हो गई थी कि बातचीत आगे होगी या नहीं.

पिछले महीने विभिन्न घटनाओं के लिए आरोप लगाया गया था कि भारतीय सुरक्षा बलों ने मानवाधिकारों का उल्लंघन किया और कई निर्दोष लोगों को मार दिया था.

एक घटना के बारे में आरोप लगाया गया था कि सैनिकों ने चरमपंथियों का मुक़ाबला करने के लिए कुछ लोगों सुरक्षा कवच के रूप में इस्तेमाल किया जिस दौरान पाँच लोगों की मौत हो गई.

कुछ ऐसी ही घटनाओं पर काफ़ी विवाद हुआ और मामला आडवाणी के भी ध्यान में लाया गया जिसके बाद सेना अध्यक्ष ने कुछ घटनाओं की जाँच के आदेश दिए थे.

हुर्रियत की ओर से इन्हीं घटनाओं की दलीलें देते हुए आगे बात न करने की धमकियाँ दी गईं थीं लेकिन दस दिन पहले दूसरे दौर की बातचीत के लिए राज़ी हो गए थे.

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