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कश्मीरी पृथकतावादी नेता असंतुष्ट
सर्वदलीय हुर्रियत कान्फ्रेंस के अब्बास अंसारी धड़े की उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से मुलाक़ात को भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेताओं ने नाकाम क़रार दिया है. पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भी चरमपंथी संगठनों ने इस बातचीत को निरर्थक बताते हुए कहा है कि इससे कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है. भारत प्रशासित कश्मीर में उदारवादी और कट्टरपंथी अलगाववादी नेताओं ने इस बातचीत का नाकाम कहा है. डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के अध्यक्ष शबीर अहमद शाह ने इसे "खोदा पहाड़ निकली चुहिया" के नतीजे वाली मुलाक़ात बताया. शबीर शाह हालाँकि सिद्धांत रूप में भारत सरकार के साथ बातचीत के हिमायती हैं लेकिन आडवाणी के साथ अब्बास अंसारी धड़े की मुलाक़ात के बारे में उन्होंने कहा, "मैं इस बातचीत से संतुष्ट नहीं हूँ." "हमने सोचा था कि भारत सरकार ने सार्क सम्मेलन के बाद अपने रुख़ में कुछ बदलाव किया है लेकिन इस मुलाक़ात से तो ऐसा कुछ नज़र नहीं आया." हुर्रियत कान्फ्रेंस के एक अन्य धड़े के नेता सैयद अली शाह गीलानी ने कहा कि उनके रुख़ को अब्बास अंसारी और उनके सहयोगियों ने आडवाणी से मुलाक़ात करके धक्का पहुँचाया है. गीलानी ने कहा कि भारत सरकार पहले कश्मीर को विवादित क्षेत्र माने. आपसी विश्वास बढ़ाने वाले क़दमों के बारे में गीलानी ने कहा कि यह तो पिछले पचास साल से सुनते आए हैं. "असल मुद्दा ये है कि भारतीय सैनाओं ने जम्मू कश्मीर को अपने क़ब्ज़े में ले रखा है." पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर कश्मीरी चरमपंथियों ने आडवाणी-हुर्रियत बातचीत को किसी नतीजे पर नहीं पहुँचने वाली मुलाक़ात बताया है. कश्मीरी चरमपंथी संगठनों की यूनाइटेड जिहाद काउंसिल के मुखिया सैयद सलाहुद्दीन ने कहा कि अब्बास अंसारी धड़े के वजूद पर ही सवालिया निशान लगे हुए हैं. "नैतिक रूप में देखें तो इस धड़े को कश्मीरी लोगों की तरफ़ से कश्मीर के भविष्य के बारे में यह बातचीत करने का कोई हक़ ही नहीं है." उन्होंने कहा कि कश्मीर कोई द्विपक्षीय मुद्दा नहीं है बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है और इसके तीन पक्ष हैं - भारत, पाकिस्तान और कश्मीरी लोग. सैयद सलाहुद्दीन ने कहा कि भारत सरकार कश्मीर को एक आंतरिक मुद्दे को रूप में पेश करना चाहती है और अंसारी धड़ा बातचीत में शामिल होकर भारत सरकार के हाथों में खेल रहा है. उन्होंने कहा कि कश्मीर में हिंसा तभी ख़त्म हो सकती है जब तीनों पक्षों के बीच बातचीत करके समस्या को हल करने की कोशिश की जाए. सैयद सलाहुद्दीन ने कहा कि वे तब तक अपना सशस्त्र संघर्ष जारी रखेंगे जब तक कि भारत से आज़ादी हासिल नहीं कर ली जाती. |
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