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गिलानी ने राजनीतिक दल बनाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर में प्रमुख पृथकतावादी नेता और हुर्रियत कान्फ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष सैयद अली शाह ग़िलानी ने नया राजनीतिक दल बनाया है. जम्मू कश्मीर तहरीक़े हुर्रियत नाम के इस नए दल के गठन का ऐलान गिलानी ने शनिवार को किया. ख़ुद गिलानी इस पार्टी के अध्यक्ष बने हैं और जमाते इस्लामी पार्टी में लंबे समय से उनके सहयोगी रहे मोहम्मद अशरफ़ सहराई को महासचिव बनाया गया है. गिलानी ने कहा है कि उनका नया राजनीतिक दल सर्वदलीय हुर्रियत कान्फ्रेंस के मुख्य धड़े का ही एक हिस्सा रहेगा. ख़ुद गिलानी ही उस धड़े के अध्यक्ष हैं. हुर्रियत कान्फ्रेंस के अंसारी धड़े का अध्यक्ष मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ को बनाया गया है. मौलवी अब्बास अंसारी ने कुछ दिन पहले अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. अंसारी धड़ा भारत सरकार के साथ बातचीत में हिस्सा ले रहा है जबकि गिलानी धड़े ने बातचीत में भाग लेने से इनकार किया हुआ है. संघर्ष सैयद अली शाह गिलानी को नया राजनीतिक दल बनाने में जमाते इस्लामी का समर्थन हासिल है.
जमाते इस्लामी के कुछ सदस्यों को तहरीके हुर्रियत-कश्मीर की भी सदस्यता हासिल करने का अधिकार होगा. गिलानी ने शनिवार को पार्टी के गठन का ऐलान करते हुए कहा कि उनका पृथकतावादी संघर्ष शांतिपूर्ण तरीक़े से जारी रहेगा. "हमारे संघर्ष में ताक़त, बंदूक, लाठी, यहाँ तक कि पत्थर तक का भी इस्तेमाल नहीं होगा." गिलानी ने चरमपंथियों के तरीक़े की आलोचना से बचते हुए कहा कि आंदोलन करने का उनका अपना तरीक़ा है. गिलानी ने अन्य पृथकतावादी दलों के साथ एकजुटता की उम्मीद जताई लेकिन कहा कि इसके लिए 'आज़ादी की मौजूदा लड़ाई' के लिए संकल्प जारी रखना होगा. |
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