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शुक्रवार, 24 अक्तूबर, 2003 को 15:33 GMT तक के समाचार
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'देश की संप्रभुता के साथ समझौता नहीं'
लालकृष्ण आडवाणी
बातचीत की ज़िम्मेदारी आडवाणी पर है

भारत के उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि कश्मीरी अलगाववादियों से बातचीत करते समय देश की एकता और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

ग़ौरतलब है कि भारत सरकार ने कश्मीरी अलगाववादियों से बातचीत करने के लिए बुधवार को अचानक लालृकृष्ण आडवाणी के नाम की घोषणा की थी.

उसके बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ संबंध बेहतर बनाने के लिए कुछ क़दम उठाने की भी घोषणा की थी.

आडवाणी ने शुक्रवार को भारतीय सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को कश्मीरी अलगाववादियों के साथ बातचीत करने में कोई एतराज़ नहीं है.

समझौता नहीं

 देश की एकता और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

लालकृष्ण आडवाणी

"लेकिन देश की एकता और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा."

आडवाणी ने कहा कि भारत सरकार कश्मीरी अलगाववादियों के साथ दरअसल सत्ता के विकेंद्रीकरण के बारे में बातचीत करना चाहती है.

भारत कश्मीर की आज़ादी या उसके पाकिस्तान में विलय की नीति की संभावनाओं को सिरे से नकारता रहा है.

लेकिन सरकार ने संकेत दिया है कि कश्मीर राज्य सरकार को ज़्यादा अधिकार देने के बारे में विचार किया जा सकता है.

सरकार ने हाल ही में हुर्रियत कान्फ्रेंस के अब्बास अंसारी धड़े को बातचीत का न्योता दिया था जबकि गिलानी धड़े को कट्टरपंथी समझा जाता है और उसे बातचीत का कोई न्योता नहीं है.

प्रतिक्रिया

सत्ता के बँटवारे के बारे में आडवाणी के इस बयान पर एक हुर्रियत कान्फ्रेंस के अब्बास धड़े के नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने कहा है कि भारत सरकार बातचीत करने के अपने इरादे से पीछे हटती नज़र आ रही है.

न्योता सबको मिले
फ़ारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला
पार्टी की बाग़डोर उमर के हाथों में है

 अगर अन्य नेताओं को आमंत्रित नहीं किया जाता है तो उदारवादियों पर कोई सौदेबाज़ी करने के आरोप लगाए जा सकते हैं.

उमर अब्दुल्ला

कश्मीर के प्रमुख विपक्षी दल नेशनल कान्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी सिर्फ़ उदारवादी अलगाववादियों को बातचीत का न्योता दिए जाने पर सवाल उठाया है.

उन्होंने कहा है कि हुर्रियत कान्फ्रेंस के दोनों धड़ों के साथ-साथ अन्य अलगाववादियों को भी बातचीत के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए.

"अगर अन्य नेताओं को आमंत्रित नहीं किया जाता है तो उदारवादियों पर कोई सौदेबाज़ी करने के आरोप लगाए जा सकते हैं."

उमर अब्दुल्ला का कहना था कि इससे शांति प्रक्रिया को एक ख़तरा पैदा हो जाएगा.

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