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बातचीत पर हुर्रियत की मिली-जुली प्रतिक्रिया
भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेताओं ने केंद्र सरकार बातचीत की पहल पर मिली-जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है. केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस से बातचीत करेंगे. हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के अलग हुए सैयद अली शाह गिलानी ने बातचीत की पेशकश को एकदम ठुकरा दिया है.
उनका कहना था,"ये अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने का प्रयास है." गिलानी का कहना था, "हमारे पास भारत की ऐसी बातों का पिछले 55 वर्षों का अनुभव है." उनका कहना था,"द्विपक्षीय बातचीत पहले भी असफल रही है और भविष्य में असफल रहेगी." उन्होंने बातचीत में पाकिस्तान को शामिल करने की अपनी बात दोहराई. सधी प्रतिक्रिया दूसरी ओर हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के मौलवी अब्बास के नेतृत्ववाले ग्रुप की ओर से सधी हुई प्रतिक्रिया आई है. इस ग्रुप के प्रमुख नेता मीरवाइज़ उमर फारूक़ का कहना था,"सबसे बेहतर तरीका है कि बातचीत में तीनों पक्षों को शामिल किया जाए."
मीरवाइज़ का कहना था कि केंद्र सरकार से आधिकारिक रूप से प्रस्ताव मिलने के बाद हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस इस पर अंतिम निर्णय लेगी. पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी बातचीत करते हैं तो ये कश्मीर में शांति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. हाल के वर्षों में अलगाववादी नेताओं और सरकार के बीच पहली उच्चस्तरीय बातचीत होगी. गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा है कि हुर्रियत के किसी भी गुट से बातचीत हो सकती है. महत्वपूर्ण है कि इस स्तर पर बातचीत ऐसे समय में होगी जबकि हाल में भारतीय कश्मीर में चरमपंथ की घटनाएँ बढ़ गई हैं. |
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