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हुर्रियत का अंसारी धड़ा बात करेगा
भारतीय कश्मीर में मौलवी अब्बास अंसारी के नेतृत्व वाले प्रमुख अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस ने भारत सरकार की बातचीत की पेशकश मान ली है. लेकिन हुर्रियत से अलग हुए कट्टरपंथी माने जाने वाले सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस के गुट ने और कश्मीरी चरमपंथियों ने इस पेशकश को ठुकरा दिया है. गिलानी का कहना है कि पाकिस्तान को शामिल किए बिना बातचीत का कोई मतलब नहीं. उधर मौलवी अब्बास अंसारी के नेतृत्व वाली हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के साथ बातचीत करने पर सहमत है. चरमपंथियों ने विरोध किया
उनका कहना था, "बातचीत करना लड़ाई-झगड़े से बेहतर है. बातचीत किस लिए हो? समस्या का समाधान करने के लिए और यही ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस की राय है." उनका कहना था कि हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस लोगों को समर्थन और प्रोग्राम को लेकर बातचीत करने जाएगी. चरमपंथी संगठन हिज़बुल मुजाहिद्दीन के 'सुप्रीम कमांडर' सैयद सलाहुद्दीन का कहना है कि तीसरे पक्ष को साथ लिए बिना बातचीत करना समाधान खोजने की जगह उसे टालना है." चरमपंथी संगठन जमीयतुल मुजाहिदीन का मानना है कि भारत की यह घोषणा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आँखों में धूल झोंकने के लिए की गई है. उनका ये भी कहना था कि भारत सरकार मौलवी अब्बास अंसारी के गुट से समझौता करना चाहती है ताकि कश्मीर के संघर्ष को कमज़ोर किया जा सके. उधर अल-नासरीन और फ़र्ज़ंदे मिल्लत संगठनों ने मौलवी अब्बास के गुट को सावधान किया है कि वो सरकार के 'जाल' में न फंसे. महिलाओं के संगठन दुख़्तराने मिल्लत ने भी भारत सरकार की पेशकश को ठुकरा दिया है. उधर पूर्ण स्वतंत्रता की पक्षधर जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ़्रंट इस विषय में फ़िलहाल चुप है. |
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