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मंगलवार, 26 अक्तूबर, 2004 को 12:53 GMT तक के समाचार
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सुझावों पर भारत की ठंडी प्रतिक्रिया
परवेज़ मुशर्रफ़
मुशर्रफ़ ने कहा स्थिति बदली जानी चाहिए
भारत ने कश्मीर विवाद के हल के बारे में पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के सुझावों पर कोई ख़ास उत्साह नहीं दिखाया है और कहा है कि पाकिस्तान को ऐसे मामलों में आधिकारिक तरीक़े ही अपनाने चाहिए.

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीर मसले पर चल रहे विवाद को हल करने के लिए सोमवार को एक नए फ़ॉर्मूले की पेशकश की.

भारत के विदश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा, "हम नहीं समझते कि जम्मू कश्मीर कोई ऐसा विषय है जिस पर मीडिया के ज़रिए बातचीत हो सकती है."

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने नई दिल्ली में पत्रकार वार्ता में कहा, "कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही व्यापक बातचीत का एक विषय है और भारत का मानना है कि ऐसा कोई सुझाव बातचीत में ही उठाया जाना चाहिए."

कश्मीर पर मुशर्रफ़ के बयान ने पाकिस्तान में ख़ासी बहस छेड़ दी है और विपक्षी दलों ने उन सुझावों को ख़ारिज कर दिया है.

उन्होंने कहा कि कश्मीर में जनमतसंग्रह कराने की अभी तक चली आ रही पाकिस्तान की माँग व्यावहारिक नहीं है और भारत नियंत्रण सीमा रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा बना देने की जो माँग करता है, वह स्वीकार्य नहीं है.

राजधानी इस्लामाबाद में विदेशी राजनयिकों के साथ सोमवार को एक इफ़्तार पार्टी में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने यह असाधारण सुझाव रखा.

कश्मीर मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस का आहवान करते हुए उन्होंने कहा कि अब स्थिति में बदलाव होना चाहिए.

परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीर का पुनर्गठन करने और वहाँ संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को और बढ़ाने का सुझाव भी रखा.

उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर में सात अलग-अलग भाषाई, भौगोलिक और धार्मिक इकाइयाँ हैं लेकिन इनके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि भारत और पाकिस्तान को यह तय करना है कि कौन सी इकाई किसके पास रहनी चाहिए और किसे स्वायत्त घोषित कर देना चाहिए.

 मेरा पक्का विश्वास है कि अनेक विकल्प हैं और समाधान भी निकाला जा सकता है. हमें पहली बार आशा की किरण नज़र आई है.
परवेज़ मुशर्रफ़

मुशर्रफ़ ने कहा, "मेरा पक्का विश्वास है कि अनेक विकल्प हैं और समाधान भी निकाला जा सकता है. हमें पहली बार आशा की किरण नज़र आई है."

इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि यह शायद पहला मौक़ा है कि पाकिस्तान के किसी शासक ने कश्मीर पर इतना साहसिक प्रस्ताव रखा है.

मुशर्रफ़ ने संवाददाताओं से कहा, "इससे पहले उन्होंने किसी से भी इस तरह से बात नहीं की है."

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि इसी साल संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनसे कुछ प्रस्ताव रखने को कहा था.

उन्होंने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी उन्होंने नया फ़ॉर्मूला पेश करने को कहा था.

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान में एक राष्ट्रीय बहस का आहवान करते हुए मुशर्रफ़ ने कहा कि कश्मीर मुद्दे पर यथा स्थिति में बदलाव होना चाहिए जोकि इस समय भारत और पाकिस्तान के बीच बँटा हुआ है.

प्रतिक्रिया

पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने परवेज़ मुशर्रफ़ के प्रस्ताव को ख़ारिज करते हुए कहा है कि वे लोगों की इच्छा के ख़िलाफ़ कश्मीर की स्थिति को बदलने नहीं देंगे.

 यह बिल्कुल पीछे मुड़ने जैसा है. आज़ादी के बाद से कश्मीर पर पाकिस्तान की जो नीति रही है, उससे बिल्कुल पीछे हटना है.
क़ाज़ी हुसैन अहमद

एक वरिष्ठ विपक्षी नेता राजा ज़ुल्फ़िक़ार हक़ ने एपी से कहा, "मैं नहीं समझता कि मुशर्रफ़ के सुझाव पाकिस्तानी और कश्मीरी लोगों के हित में हैं."

सबसे तीखी प्रतिक्रिया इस्लामी दलों के गठबंधन की तरफ़ से आई है जिन्होंने इन सुझावों को "कश्मीरी लोगों के साथ धोखा" बताया है.

गठबंधन के उपाध्यक्ष क़ाज़ी हुसैन अहमद ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "यह बिल्कुल पीछे मुड़ने जैसा है. आज़ादी के बाद से कश्मीर पर पाकिस्तान की जो नीति रही है, उससे बिल्कुल पीछे हटना है."

उन्होंने कहा, "जो भी सुझाव हों, उन्हें संसद में रखा जाना चाहिए."

लेकिन कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इन सुझावों पर किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले इन पर गहराई से विचार होना चाहिए."

 इससे कश्मीर मुद्दे पर नई शुरूआत हो सकती है लेकिन कश्मीरी चरमपंथियों और राजनीतिक संगठनों का रुख़ महत्वपूर्ण होगा.
विश्लेषक मोनिस आमिर

एक विश्लेषक मोनिस आमिर का कहना है, "इससे कश्मीर मुद्दे पर नई शुरूआत हो सकती है लेकिन कश्मीरी चरमपंथियों और राजनीतिक संगठनों का रुख़ महत्वपूर्ण होगा."

जम्मू कश्मीर हुर्रियत कान्फ्रेंस ने परवेज़ मुशर्रफ़ के सुझावों पर नपीतुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

हुर्रियत कान्फ्रेंस के नेता सैयद अली शाह गिलानी ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "जम्मू कश्मीर के जिन लोगों ने 1947 से क़ुर्बानियाँ दी हैं उन्हें आत्म निर्णय का अधिकार दिया जाना चाहिए या फिर विवाद को हल करने लिए त्रिपक्षीय बातचीत होनी चाहिए."

हुर्रियत कान्फ्रेंस के उदारवादी समझे जाने वाले धड़े ने भी कुछ सावधानी भरी प्रतिक्रिया दी है.

हुर्रियत कान्फ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल ग़नी बट ने कहा, "मुशर्रफ़ ने अपना सुझाव एक विकल्प के तौर पर रखा होगा. यह सुझाव मुशर्रफ़ और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच न्यूयॉर्क में हुई बातचीत का कोई नतीजा भी हो सकता है."

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता शबीर अहमद शाह ने मुशर्रफ़ के सुझावों का यह कहते हुए स्वागत किया है कि इससे विवाद के हल के लिए ज़्यादा संभावनाएँ पैदा होंगी.

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