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पाकिस्तान में विपक्ष का विरोध तेज़ हुआ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को दो पदों पर बने रहने की अनुमति के सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध तेज़ होता जा रहा है. शुक्रवार को विपक्षी पाकिस्तान अवामी तहरीक के अध्यक्ष ताहिरुल क़ादरी ने विरोध प्रकट करते हुए संसद से इस्तीफ़ा दे दिया. उनका कहना था कि उनका विवेक उन्हें ऐसी संसद में बैठने की अनुमति नहीं देता जो एक वर्दीधारी व्यक्ति को देश के राष्ट्रपति के रूप में देखना चाहता है. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने बृहस्पतिवार को एक विधेयक पारित करके जनरल मुशर्रफ़ को यह अधिकार प्रदान कर दिया था. उपरी सदन में पारित होने के बाद यह क़ानून की शक्ल ले लेगा.
उधर, अन्य विपक्षी सदस्य भी इस मामले को लेकर विरोध जारी रखे हुए हैं और शुक्रवार को उन्होंने संसद के बाहर ज़ोरदार प्रदर्शन किए. इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि ताहिरुल क़ादरी के इस्तीफ़े के फ़ैसले ने न केवल सत्तारूढ़ सांसदों को बल्कि विपक्षी सदस्यों को भी हैरत में डाल दिया. नेशनल असेंबली में वह अपनी पार्टी के एकमात्र प्रतिनिधि थे. क़ादरी ने संसद की कार्रवाई शुरू होते ही घोषणा कर दी कि वह अपने पद से इस्तीफ़ा दे रहे हैं. उन्होंने मुशर्रफ़ को अधिकार दिए जाने के फ़ैसले को संसदीय लोकतंत्र का अपमान बताया. अपने ऐलान के बाद जब उन्होंने सदन से वॉकआउट किया तो अन्य विपक्षी सदस्य भी उनके समर्थन में खड़े हो गए और उन्होंने 'मुशर्रफ़ चले जाओ' के नारे लगाए. एक अन्य सांसद एतज़ाज़ अहसन ने सरकार के क़दम को संसदीय प्रभुसत्ता के साथ खिलवाड़ बताया. विपक्षी सांसदों ने संसद के बाहर मुख्य सड़क पर धरना भी दिया जिससे यातायात को रोकना पड़ा. |
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