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मंगलवार, 12 अक्तूबर, 2004 को 10:31 GMT तक के समाचार
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पाकिस्तान में तख़्तापलट के पाँच वर्ष
परवेज़ मुशर्रफ़
पद संभालते हुए राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने राष्ट्र से कई वायदे किए थे
पाकिस्तान में प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को पद से हटाकर परवेज़ मुशर्रफ़ के सत्ता में आने की पाँचवी वर्षगाँठ मंगलवार को विवादों के बीच मनाई जा रही है.

जहाँ एक ओर सरकार ने अख़बारों में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ और प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ की बड़ी-बड़ी तस्वीरों के साथ विज्ञापन दिए हैं, वहीं वकीलों के संगठन और विपक्षी पार्टियाँ 12 अक्तूबर को 'काला दिवस' के रूप में मना रही हैं.

अख़बारों में छपे विज्ञापनों में बताया गया है कि किस तरह राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के नेतृत्व में देश ने प्रगति की है, कौन से वादे हैं जो पूरे हुए हैं और सरकार की बड़ी सफलताएँ क्या रही हैं.

विज्ञापन ही नहीं बल्कि पाकिस्तान के कुछ अख़बारों में इस मौक़े पर विशेष परिशिष्ट भी प्रकाशित किए गए हैं जिनमें विस्तार से सरकार की नीतियों की सफलता का विवरण दिया गया है.

सरकार के प्रायोजन से छपे इन परिशिष्टों में विदेश नीति, आर्थिक नीति से लेकर आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष तक, सभी विषयों पर विस्तृत सामग्री है.

विरोध

मुस्लिम लीग
विपक्षी पार्टियों ने विरोध का आह्वान किया है

दूसरी ओर, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के प्रवक्ता सिद्दीक़ उल फ़ारूक़ ने कहा है कि उनकी पार्टी देश भर में अपने कार्यालयों पर काले झंडे लगाएगी.

पार्टी ने देश के अनेक शहरों में विरोध सभाएँ आयोजित करने का भी ऐलान किया है जबकि देश के वकील इस्लामाबाद में सुप्रीम कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करने वाले हैं.

पाकिस्तान में तख़्तापलट की पाँचवी वर्षगाँठ ऐसे समय पर हो रही है जबकि वहाँ राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के सेनाध्यक्ष के पद पर बने रहने को लेकर विवाद चल रहा है.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने पहले सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने का वादा किया था लेकिन बाद में घोषणा की गई कि "बदली हुई परिस्थितियों के कारण " उनका पद पर बने रहना राष्ट्रहित में है.

उपलब्धियाँ

परवेज़ मुशर्रफ़ के पाँच वर्ष के कार्यकाल में देश में हुई प्रगति का जो ब्यौरा दिया गया है उनमें दस नए टीवी चैनल खुलने और एफएम रेडियो स्टेशनों की स्थापना का भी उल्लेख है.

कहा गया है कि मीडिया की आज़ादी और प्रसार के ज़रिए पाकिस्तान की मौजूदा सरकार लोकतंत्र को बढ़ावा देना चाहती है.

एक और उदाहरण मोबाइल फ़ोन और इंटरनेट के क्षेत्र में हुए विकास का दिया गया है, सरकार का कहना है कि 1999 में देश में सिर्फ़ दो लाख मोबाइल फ़ोन कनेक्शन थे जो अब बढ़कर 40 लाख हो गए हैं जबकि इंटरनेट कनेक्शन भी इतनी ही तेज़ी से बढ़े हैं.

जबकि पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों का कहना है कि परवेज़ मुशर्रफ़ के कार्यकाल में देश में अव्यवस्था बढ़ी है, ग़रीबों की समस्याएँ बढ़ी हैं.

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