|
मुशर्रफ़ को सेनाध्यक्ष बने रहने की उम्मीद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि हो सकता है कि वे सेनाध्यक्ष के पद पर बने रहे. पाकिस्तान में पिछले कई दिनों से ये अटकलें चल रहीं हैं कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद छोडेंगे या नहीं. वाशिंगटन पोस्ट के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि वे सेनाध्यक्ष के पद पर भी बने रहें. दरअसल पिछले साल दिसंबर में मुशर्रफ़ ने घोषणा की थी कि वे इस साल के आख़िर तक सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे. लेकिन पिछले दिनों पहले सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद और फिर प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने यह बयान दिया कि देश हित में मुशर्रफ़ को सेनाध्यक्ष बने रहना चाहिए. वाशिंगटन पोस्ट के साथ इंटरव्यू में मुशर्रफ़ ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी इस बारे में कोई आख़िरी फ़ैसला नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि वे अभी इस मामले पर जनता की नब्ज टटोलने की कोशिश कर रहे हैं. मुशर्रफ़ ने पिछले साल दिसंबर में अपने दिए बयान के बारे में कहा कि उस समय से देश की सुरक्षा व्यवस्था में काफ़ी बदलाव आ गए हैं. लोकतंत्र मुशर्रफ़ ने कहा कि सेनाध्यक्ष के पद पर बने रहने के फ़ैसले से देश के लोकतंत्र का कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया इस मामले पर बखेड़ा खड़ा कर रही है. बुधवार को सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद ने कहा था कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने सेनाध्यक्ष का पद नहीं छोड़ने का फ़ैसला किया है.
लेकिन बाद में उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया और सफ़ाई दी कि उन्होंने सिर्फ़ इस बारे में उम्मीद जताई थी. नेशनल एसेंबली में भी गुरूवार को इस मुद्दे पर बहस हुई कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ एक साथ राष्ट्रपति और सेना प्रमुख के पद पर बने रह सकते हैं या नहीं. पाकिस्तान में सरकार के समर्थन से एक अभियान चलाया जा रहा है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ इस साल 31 दिसंबर के बाद भी सेनाध्यक्ष के पद पर बने रहें. विपक्ष ने सरकार के समर्थन से चल रहे इस अभियान पर गुरूवार को संसद से वॉकआउट किया. कुछ विपक्षी सदस्यों ने सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद के उस बयान की निंदा की जिसमें उन्होंने उम्मीद जताई थी कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ अपनी सैनिक वर्दी को नहीं छोड़ेंगे. प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ ने भी पत्रकारों से कहा था कि वे चाहते हैं कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सेना प्रमुख के पद पर बने रहेंगे तो यह देश हित में रहेगा. मुशर्रफ़ के सेनाध्यक्ष के पद पर बने रहने को लेकर तो अटकलें लंबे समय से चल रहीं थी लेकिन सोमवार को ये बहस और गर्म हुई जब पंजाब प्रांत की विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर मुशर्रफ़ से ये आग्रह किया गया कि वे आतंकवाद का सामना करने के लिए और आर्थिक स्थिरता के लिए दोनों ही पदों पर बने रहें. इसके जवाब में पाकिस्तान की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टियों ने बुधवार को उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत की विधानसभा में एक अलग प्रस्ताव लाया जिसमें मुशर्रफ़ से कहा गया है कि वे किसी एक पद पर बने रहने के अपने वादे से ना मुकरें. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||