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रशीद ने मुशर्रफ़ पर बयान वापस लिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद ने कहा है कि उन्होंने सिर्फ़ ये उम्मीद जताई थी कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष- दोनों पदों पर बने रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि अभी इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने पिछले साल यह घोषणा की थी कि वे इस साल दिसंबर में एक पद छोड़ देंगे इससे पहले पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख़ रशीद ने कहा था कि परवेज़ मुशर्रफ़ दोनों पदों पर बने रहेंगे. शेख़ रशीद ने कहा था, "देश की स्थिति को देखते हुए उनका दोनों पदों पर बने रहना ही ठीक है." लेकिन अब उनका कहना है कि अभी इस बारे में कोई आख़िरी फ़ैसला नहीं हुआ है. इस मामले पर पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से अटकलबाज़ियों का दौर चल रहा है और विपक्षी पार्टियाँ माँग कर रही हैं कि मुशर्रफ सेनाध्यक्ष का पद छोड़े दें. विपक्षी दल संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर लगातार दबाव बनाते रहे हैं और परवेज़ मुशर्रफ़ को उनका वादा याद दिलाते रहे हैं.
ज़ाहिर है कि इस घोषणा के बाद पाकिस्तान के विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया काफ़ी उग्र होगी, ख़ास तौर पर पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस्लामी पार्टियों की. विपक्षी गठबंधन मुत्तहिदा मजलिसे अमल ने इस मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया है. जनरल मुशर्रफ़ ने 12 अक्तूबर 1999 को नवाज़ शरीफ़ को पद से हटाकर पाकिस्तान की सत्ता को अपने नियंत्रण में लिया था और तब से वे दोनों पदों पर बने हुए हैं. परवेज़ मुशर्रफ़ ने वर्ष 2001 में भारत के साथ आगरा शांति वार्ता के ठीक पहले अपने आप को राष्ट्रपति घोषित कर दिया था, उसके पहले उन्हें चीफ़ एक्ज़ेकेटिव कहा जाता था. बाद में एक जनमत संग्रह का आयोजन किया गया था जिसमें "बहुमत से" परवेज़ मुशर्रफ़ को राष्ट्रपति के तौर पर मान्यता दे दी गई. इसी महीने उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान के 96 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि वे सेनाध्यक्ष के पद पर भी बने रहें. |
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