|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष का पद छोड़ेंगे
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ अगले साल के अंत में पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने को तैयार हो गए हैं. इसकी घोषणा पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस्लामी पार्टियों के गठबंधन मुत्तहिदा मजलिसे अमल यानि एमएमए के साथ हुए एक समझौते के बाद की गई है. एमएमए काफ़ी समय से माँग करता आया है कि परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष में से केवल एक ही पद पर बने रह सकते हैं. अपनी माँग को लेकर एमएमए कई महीनों से पाकिस्तान की संसद में बार-बार हंगामा करता रहा है और संसद की कार्यवाही में भी बाधा डालता आया है. अब इस समझौते को संवैधानिक संशोधन के रूप में 26 दिसंबर को संसद के सामने लाया जाएगा. इस समझौते के तहत यदि राष्ट्रपति को सरकार बर्ख़ास्त करनी हो तो पहले सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति लेनी होगी.
पाकिस्तान के सूचना मंत्री शेख़ रशीद का कहना था, "ये लोकतंत्र के लिए और देश में स्थिरता के लिए अच्छा फ़ैसला है. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने दिखा दिया है कि वे लोकतंत्र के प्रति पूरी निष्ठा रखते हैं." राष्ट्रपति मुशर्रफ़ कुछ विशेष अधिकार छोड़ने के लिए भी राज़ी हो गए हैं जो उन्हें संविधान में कुछ संशोधनों के बाद मिले थे. उधर,पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली को लिए प्रयास करने वाले संगठन 'एलायंस फ़ॉर रेस्टोरेशन ऑफ़ डेमोक्रेसी' के नेता रज़ा रब्बानी ने बीबीसी से बातचीत में कहा," हमें संविधान का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं है फिर वह चाहे एक मिनट के लिए हो या फिर एक साल के लिए." उनका कहना था कि ये संविधान और लोकतंत्र के मौलिक सिद्धांतों के विरुद्ध है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||