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परवेज़ मुशर्रफ़ को सत्ता में हुए चार साल
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के शासन के चार साल पूरा होने पर मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच ने मानवाधिकारों को लेकर उनकी कड़ी आलोचना की है. बारह अक्टूबर,1999 को परवेज़ मुशर्रफ़ सैनिक बग़ावत के ज़रिए सत्ता में आए थे.
अमरीका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच ने एक खुला पत्र राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को भेजा है. इसमें आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान की सैनिक एजेंसियों ने राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और पुराने सरकारी अधिकारियों का उत्पीड़न किया था. ह्यूमन राइट्स वाच के एशिया विभाग के निदेशक ब्राड एड्म्स का कहना था," परवेज़ मुशर्रफ़ के शासनकाल में पाकिस्तान में न्यायपालिका कमज़ोर हुई है, प्रमुख राजनीतिक दल शाक्तिहीन हुए हैं और कट्टरपंथी धार्मिक पार्टियों की ताक़त बढ़ी है." वैधता सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने जनमत संग्रह के ज़रिए अपने आपको सत्ता में बने रहने को वैधता दिला दी थी. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ मानते हैं कि उनकी सुधारवादी नीतियाँ देश के हित में हैं. पाकिस्तान के इतिहास में इससे पहले भी ऐसे कई मौक़े आए हैं जब सैनिक शासकों ने सत्ता हथिया ली थी. पिछले सप्ताह अमरीका के विदेश उपमंत्री रिचर्ड आर्मिटेज ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पाकिस्तान की सेना पूरी तरह राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ है. इसके पहले अमरीका की ओर से बयान आया था कि पाकिस्तानी सेना के कुछ सदस्य तालेबान और अल क़ायदा के ख़िलाफ़ अमरीकी कार्रवाई में सहयोग नहीं करते. |
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