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शौक़त अज़ीज़ प्रधानमंत्री चुने गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की संसद ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के नज़दीकी माने जाने वाले नेता शौक़त अज़ीज़ को औपचारिक रूप से शुक्रवार को नया प्रधानमंत्री चुन लिया. शौक़त अज़ीज़ अभी तक मौजूदा सरकार में वित्त मंत्री रहे हैं और वह पिछले सप्ताह संसद के लिए चुने गए थे क्योंकि प्रधानमंत्री बनने के लिए यह ज़रूरी था. शौक़त अज़ीज़ को 345 सदस्यों वाली संसद में 191 मत मिले. विपक्ष ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. विपक्ष ने स्पीकर की इस घोषणा के बाद बहिष्कार का ऐलान किया कि उनके उम्मीदवार जावेद हाशमी को सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए जेल से रिहा नहीं किया जा सकता. जावेद हाशमी इस्लामाबाद के नज़दीक ही रावलपिंडी में जेल में बंद हैं और उन पर सेना के ख़िलाफ़ गतिविधियों में शामिल होने सहित अनेक गंभीर आरोप लगे हैं. उन पर मुक़दमा भी जेल के अंदर ही चल रहा है. जावेद हाशमी भी प्रधानमंत्री पद के लिए खड़े होने के इच्छुक थे क्योंकि वह निचले सदन के अब भी सदस्य हैं. लेकिन संसद के स्पीकर चौधरी आमिर हुसैन ने कहा कि जावेद हाशमी को अदालत ने दोषी ठहराया है इसलिए वे संसद की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकते. विपक्ष का कहना था इस तरह से सिर्फ़ एक ही उम्मीदवार को खड़ा करके प्रधानमंत्री नियुक्त करने लेना अलोकतांत्रिक है. विपक्ष नाराज़ विपक्षी एआरडी के एक प्रवक्ता सादिक़ अल फ़ारूक़ ने कहा है कि स्पीकर चौधरी आमिर हुसैन को विपक्ष के अनुरोध को नामंज़ूर करने का कोई अधिकार नहीं था.
विपक्ष ने अनुरोध किया था कि स्पीकर जावेद हाशमी को संसद की कार्यवाही में भाग लेने के लिए जेल से रिहा किया जाए. एआरडी के प्रवक्ता सादिक़ अल फ़ारूक़ ने कहा, "स्पीकर ने वर्दी पहनने वाले एक तानाशाह से हुक्म लिया और हम इस फ़ैसले को नकारते हैं." संवाददाताओं का कहना है कि शौक़त अज़ीज़ का चुना जाना महज़ एक औपचारिकता बची थी. इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि हालाँकि जावेद हाशमी जीत हासिल करने का तो मौक़ा नहीं मिला लेकिन इससे इस मामले में बरती गई कथित अनियमितता सामने आ गई है और इससे सरकार को काफ़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है. शौक़त अज़ीज़ कार्यवाहक प्रधानमंत्री चौधरी शुजाअत हुसैन से कार्यभार संभालेंगे जो पहले ही बुधवार को इस्तीफ़ा दे चुके हैं और यह सत्ता हस्तांतरण पहले से ही तयशुदा योजना के तहत हो रहा है. चौधरी शुजाअत हुसैन ने जून में तत्कालीन प्रधानमंत्री मीर ज़फ़रुल्लाह ख़ाँ जमाली के इस्तीफ़ा देने के बाद कार्यभार संभाला था. |
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