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कराची में मस्जिद में गोलीबारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की व्यावसायिक राजधानी कराची में बुधवार तड़के एक मस्जिद में हुई गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया. यह हमला कराची के बंगाली पाड़ा इलाक़े की एक सुन्नी मस्जिद में सुबह की नमाज़ के वक़्त हुआ जब वहाँ क़रीब ढाई सौ लोग इकट्ठा थे. पुलिस ने कहा है कि अभी यह साफ़ नहीं है कि यह हमला "एक आतंकवादी कार्रवाई था या फिर किसी निजी दुश्मनी का नतीजा." कराची पुलिस ने बताया, "दो लोग पीले रंग की टैक्सी में आए और मोहम्मदी मस्जिद के बाहर उतरकर पिस्तौल से गोलियाँ चलाईं जिसमें एक मोहम्मद इस्माईल नाम के एक व्यक्ति की मौक़े पर ही मौत हो गई. इलाक़े के टाउन पुलिस अधिकारी इमरान अहमद का कहना है कि शुरूआती जाँच के बाद घटना धार्मक आतंकवाद या सांप्रदायिक हिंसा का मामला नहीं लगता क्योंकि हमलावरों ने सिर्फ़ दो फ़ायर किए थ जबकि मस्जिद में क़रीब ढाई सौ लोग इकट्ठा थे. उधर नमाज़ियों का कहना है कि अगर ये किसी ख़ास आदमी को निशाना बनाने का मामला है तो ये कही भी हो सकता था और उसके लिए फ़ज्र की नमाज़ का वक़्त ही क्यों चुना गया जब मस्जिद नमाज़ियों से भरी हुई थी. इस हमले में मस्जिद के इमाम साजिद गंभीर रूप से घायल हो गए. मुफ़्ती फ़ारूक़ अहमद सिद्दीक़ी की टाँग में गोली लगी. उन्होंने कहा, किसी ने नमाज़ के दौरान ही गोली चलानी शुरू कर दी थी. मैंने अपने पीछे गोली चलने की आवाज़ सुनी थी और उसके बाद लोग भागना शुरू हो गए." पिछले महीने एक सुन्नी मौलवी मुफ़्ती मोहम्मद जमील की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और अगस्त में एक मस्जिद पर हुए दो बम धमाकों में पाँच लोग मारे गए थे. कराची में हाल के दिनों में मस्जिदों पर कई हमले हुए हैं जिनके लिए प्रतिबंधित शिया और सुन्नी संगठनों पर आरोप लगाया जाता है. |
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