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तालेबान समर्थक मौलवी की हत्या | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में तालेबान समर्थक प्रमुख मौलवी मुफ़्ती निज़ामुद्दीन शामज़ई की अज्ञात बंदूकधारियों ने हत्या कर दी है. अफ़ग़ानिस्तान में तीन साल पहले तालेबान शासन के अंत से पहले उसके नेता मुल्ला उमर से शामज़ई मिल चुके थे. शामज़ई बिनोरी टाउन मस्जिद के सुन्नी इस्लामिक स्कूल में उपदेश भी देते थे. इस घटना के तुरंत बाद ही कराची में हिंसा भड़क गई है और कराची शहर के पुलिस प्रमुख का कहना है कि हिंसा रोकने की कोशिशें की जा रही हैं. इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि मुफ़्ती शामज़ई की गाड़ी पर दो दिशाओं से गोलियाँ चलाई गईं. उस समय वह अपने घर से निकलकर उसी इस्लामी मदरसे की ओर जा रहे थे. पुलिस का कहना है कि स्वचालित बंदूक से कई गोलियाँ चलाई गईं और उसके बाद अज्ञात हमलावर भाग निकले. घटना में शामज़ई का एक पुत्र, उनका भतीजा और ड्राइवर भी घायल हुए हैं. मगर डॉक्टरों का कहना है कि 75 वर्षीय मौलवी को कई गोलियाँ लगीं और उनकी मृत्यु हो गई.
उनकी मौत की ख़बर शहर में जंगल की आग की तरह फैल गई. मदरसे के छात्रों ने एक पुलिस थाने पर हमले कर दिए और उसे आग लगा दी. कराची पुलिस प्रमुख का कहना है कि हिंसा और क्षेत्रों में नहीं फैले इसकी हरसंभव कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि अभी तक इस हत्या की ज़िम्मेदारी किसी ने नहीं ली है और अभी किसी को दोषी ठहराना जल्दबाज़ी भी होगी. मुफ़्ती शामज़ई प्रमुख सुन्नी आलिम थे और अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन के प्रमुख समर्थकों में से एक थे. मगर तालेबान शासन के अंत के बाद से उनकी गतिविधियाँ कम थीं और अधिकारी अभी तक इस हत्या के पीछे की वजह निश्चित नहीं कर पा रहे हैं. |
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