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कराची में सुन्नी मौलवी की हत्या | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की व्यावसायिक राजधानी कराची में शनिवार को एक प्रमुख सुन्नी मौलवी सहित दो लोगों की हत्या कर दी गई. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुन्नी मौलवी मुफ़्ती मोहम्मद जमील अपने घर की तरफ़ जा रहे थे कि कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने उनकी कार को रोका और उन पर स्वचारित रायफ़लों से अंधाधुंध गोलियाँ बरसानी शुरू कर दीं. मुफ़्ती एक ग़ैरसरकारी इस्लामी संगठन के नेता थे. उनके एक सहयोगी नज़ीर अहमद भी उनके साथ ही मारे गए. इस सप्ताह के शुरू में स्यालकोट की एक शिया मस्जिद में हुए एक भयंकर बम धमाके और मुल्तान में एक सुन्नी जलसे में विस्फोट से 70 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. मुल्तान में हुए बम धमाके की अभी किसी ने ज़िम्मेदारी नहीं ली है और कराची में अधिकारियों का कहना है कि मुफ़्ती जमील की हत्या के पीछे किसका हाथ है, इस बारे में भी कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी. ताबड़तोड़ पुलिस के मुताबिक़ बंदूकधारी एक मोटरसाइकिल पर सवार थे और मुफ़्ती जमील की कार पर उन्होंने कई राउंड गोलियाँ चलाईं. दोनों मौलवियों ने अस्पताल ले जाते वक़्त रास्ते में ही दम तोड़ दिया.
मुफ़्ती जमील एक प्रतिष्ठित धार्मिक हस्ती थे और उनकी मौत से पूरे देश में ख़ासकर कराची में गहरा सदमा पहुँचा है. हालाँकि पाकिस्तान में सुन्नी और शिया मुसलमानों के बीच हिंसा काफ़ी अरसे से चली आ रही है लेकिन यह महीना जातीय हिंसा में बहुत जानलेवा साबित हुआ है. स्यालकोट में एक शिया मस्जिद में हुए बम धमाके में 30 से ज़्यादा और उसके बाद गुरूवार को मुल्तान में एक कार के ज़रिए किए गए विस्फोट में 40 से लोगों की जान चली गई थी. इन दोनों हिंसक घटनाओं के बाद सरकार ने सभी मस्जिदों के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं और धार्मिक संगठनों की तरफ़ से की जाने वाली राजनीतिक सभाओं पर पाबंदी लगा दी है. लेकिन मुफ़्ती मोहम्मद जमील की हत्या से साफ़ ज़ाहिर होता है कि चरमपंथियों पर इस पाबंदी का कोई असर नहीं हुआ है और वे जब चाहें, इस तरह के हमले कर सकते हैं. |
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