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निष्पक्ष चुनाव को लेकर आशंका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अगले माह अफ़ग़ानिस्तान में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के बारे में जारी एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि वहाँ असुरक्षा का माहौल है और कुछ शक्तिशाली लोग मतदाताओं को डरा धमका भी रहे हैं. अफ़ग़ानिस्तान के एक स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग और संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि वहाँ लोगों को लोकतंत्र के बारे में पूरी जानकारी न होने की वजह से चुनावों में उन्हें आसानी से भ्रमित किया जा सकता. उल्लेखनीय है कि सन 2001 में तालिबान हुकूमत का तख़्ता पलट हो जाने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में यह चुनाव वहाँ लोकतंत्र की स्थापना के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण माने जा रहे हैं. इन चुनाव में राष्ट्रपति हामिद करज़ई लोकप्रिय जनमत हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं. उन्हें एक जाना पहचाना चेहरा भी माना जाता है लेकिन उन्हें कई उम्मीदवारों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है जिनमें एक महिला भी शामिल है. असुरक्षा का माहौल अफ़ग़ान मानवाधिकार आयोग की प्रमुख सीमा समर ने बीबीसी को बताया कि बहुत से मतदाताओं को गुप्त मतदान के अपने अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी नहीं है. उनका कहना था कि कुछ शक्तिशाली लोग मतदाताओं और उम्मीदवारों को डरा धमका रहे हैं और कुछ राजनीतिक दल इस डर की वजह से अपने राजनीतिक कार्यक्रमों की जानकारी भी नहीं ज़ाहिर कर रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों पर स्थानीय क़बायली नेताओं का नियंत्रण होने की वजह से इस बात की पूरी संभावना है कि वह आम लोगों की राय का इज़हार नहीं होने देंगे या उसे प्रभावित करेंगें. इस रिपोर्ट में उठाया गया दूसरा प्रमुख मुद्दा असुरक्षा की भावना का है. जिन क्षेत्रों में चरमपंथी गुट सक्रिय हैं वहाँ वे नहीं चाहते कि राजनीतिक प्रक्रिया सफल हो और इसलिए वे हिंसक घटनाएँ कर रहे हैं और इस बात पर आमादा हैं कि यह प्रक्रिया सफल न होने पाए. इसलिए रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि चुनावी प्रक्रिया को सफल बनाया जाना है तो इन सारी समस्याओं का निवारण किया जाना चाहिए. उधर तालिबान और कुछ दूसरे चरमपंथी इस्लामी संगठनों ने प्रतिज्ञा की है कि वे चुनाव को विफल बनाएँगे. पिछले सप्ताह राजधानी काबुल में एक अमरीकी सुरक्षा कंपनी के दफ़्तर के बाहर हुए बड़े बम धमाके में छह लोग मारे गए थे जिनमें तीन अमरीकी थे. पिछले सप्ताह ही यूरोप में चुनावों की निगरानी करने वाली सुरक्षा और सहयोग की एक अंतराष्ट्रीय संस्था ने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में चुनावों की सही ढंग से निगरानी करना सुरक्षित नहीं है. |
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