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रविवार, 01 अगस्त, 2004 को 20:57 GMT तक के समाचार
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अफ़ग़ान मतदाताओं में भारी उत्साह
हामिद करज़ई
करज़ई के ख़िलाफ 22 उम्मीदवार मैदान में हैं
अफ़ग़ानिस्तान में पहले राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन का काम काफ़ी हद तक पूरा हो गया है.

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अब तक 90 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने नाम दर्ज करा लिया है, संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता डेविड सिंह ने कहा, "लोगों का उत्साह कमाल का है."

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कुल 98 लाख मतदाताओं में से 87 लाख लोगों ने मतदान के लिए अपना नाम दर्ज कराया है, इनमें से 41 प्रतिशत महिलाएँ हैं.

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने स्वीकार किया कि सुरक्षा अब भी एक बड़ी समस्या है, लेकिन "रजिस्ट्रेशन से ज़ाहिर हो गया है कि अफ़ग़ान जनता ख़तरे के बावजूद मताधिकार का प्रयोग करने के लिए कृतसंकल्प है."

अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव अक्तूबर में होने वाले हैं और वहाँ हिंसा लगातार जारी है, इसी कारण वहाँ चुनाव की तारीख़ें दो बार आगे बढ़ाई जा चुकी हैं.

 रजिस्ट्रेशन से ज़ाहिर हो गया है कि अफ़ग़ान जनता ख़तरे के बावजूद मताधिकार का प्रयोग करने के लिए कृतसंकल्प है
संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता

अधिकारी, राहत कर्मचारी और आम नागरिक संदिग्ध तालेबान छापामारों का निशाना बनते रहे हैं, ऊपर से कबायली सरदारों की निजी सेनाएँ हैं जो चुनाव के नतीजों पर अपना असर डालना चाहते हैं.

अमरीकी सैनिक कार्रवाई के बाद 2001 में सत्ता से खदेड़े गए तालेबान ने चुनाव में बाधा डालने की हरसंभव कोशिश करने की ठानी है.
इसका असर भी दिख रहा है, तालेबान का गढ़ माने जाने वाले कंधार के आसपास के इलाक़ों में मतदान के लिए रजिस्ट्रेशन की गति बाक़ी हिस्सों के मुक़ाबले काफ़ी धीमी है.

विशेषज्ञों का कहना है कि कबीलों के बीच की होड़ के कारण भी रजिस्ट्रेशन की गति तेज़ रही क्योंकि वे अपने कबीले का पूरा प्रतिनिधित्व चाहते हैं.

गड़बड़ियाँ

रजिस्ट्रेशन को लेकर कई स्थानों पर गड़बड़ियाँ भी हुई हैं, मिसाल के तौर पर मज़ारे शरीफ़ में नाम दर्ज कराने वालों की संख्या कुल मतदाताओं की अनुमानित संख्या से अधिक हो गई.

माना जा रहा है कि या मतदाताओं की संख्या का ग़लत अनुमान लगाया गया था या फिर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है.

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि चुनाव में बहुत सारी चुनौतियाँ हैं लेकिन उन्हें विश्वास है कि भारत की तरह ऊँगली न मिटने वाली स्याही लगाने से धाँधली पर रोक लगाई जा सकेगी.

अफ़ग़ानिस्तान में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को देश में लोकतंत्र की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम माना जा रहा है.

अंतरिम राष्ट्रपति हामिद करज़ई चुनाव लड़ रहे हैं और उनके ख़िलाफ़ 22 उम्मीदवार मैदान में हैं.

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