| मणिपुर में अनिश्चितकालीन बंद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में सुरक्षा बलों को मिले विशेषाधिकार का विरोध कर रहे एक छात्र नेता की आत्मदाह से हुई मौत के बाद राज्य में अनिश्चितकालीन बंद शुरू हो गया है. इससे जनजीवन प्रभावित दिख रहा है. इधर केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल के अनुसार सरकार मणिपुर की स्थिति पर नज़र रखे है. पाटिल की अनुपस्थिति में गृह राज्य मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने उनका बयान पढ़ा. बयान में कहा गया है कि चूँकि राज्य में लंबे समय से चरमपंथ चल रहा था इसलिए उसे अशांत क्षेत्र घोषित करके वहाँ सुरक्षा बलों को विशेषाधिकार दिया गया. इधर इस क़ानून का विरोध कर रहे 32 संगठनों ने राज्य के सभी विधायकों से पाँच दिन के भीतर इस्तीफ़ा दे देने की माँग की है. संगठन के एक प्रवक्ता के अनुसार अगर विधायक ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें लोगों के ग़ुस्से का सामना करना पड़ सकता है. इस क़ानून का विरोध करते हुए एक छात्र नेता पेबम चितरंजन ने आत्मदाह कर लिया था जिससे उनकी मौत हो गई. इसके बाद इन संगठनों ने कहा कि विधायक लोगों के हितों की रक्षा करने में विफल रहे हैं और छात्र नेता की मौत के लिए भी वे ही ज़िम्मेदार हैं. बाज़ार, व्यापार बंद उनकी मौत के बाद शुरू हुए अनिश्चितकालीन बंद की वजह से बाज़ार, दुकानें और व्यापार बंद पड़े हैं. बंद के समर्थन में बस सेवाएँ भी ठप हैं. सरकारी कार्यालयों में लोगों की उपस्थिति भी नहीं के बराबर है. इससे पहले इन संगठनों ने राज्य में भारत के अन्य राज्यों की बनी चीज़ों के बहिष्कार का अभियान शुरू किया था. इन संगठनों की ओर से एक प्रवक्ता ने बताया कि मणिपुरी लोगों की आकांक्षाओं के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनहीनता को देखते हुए उन्हें बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा. क़ानून के बढ़ते विरोध के बीच मणिपुर सरकार राजधानी इंफ़ाल के कुछ हिस्सों से विशेष क़ानून को हटाने की घोषणा कर चुकी है. लेकिन अब मुख्यमंत्री ने धमकी दी है कि अगर आंदोलन तेज़ किया गया तो वे इस क़ानून को फिर से लागू करने का फ़ैसला भी ले सकते हैं. लेकिन आंदोलनकारियों का माँग है कि यह क़ानून सिर्फ़ इंफ़ाल से ही नहीं बल्कि पूरे राज्य से हटाया जाए. |
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