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मणिपुर में क़ानून वापस लेने का फ़ैसला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की सरकार ने विवादित क़ानून वापस लेने की सिफ़ारिश की है, अब इस पर केंद्र सरकार फ़ैसला करेगी. केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल विशेषाधिकार अधिनियम नाम का यह क़ानून सैनिकों और अर्द्धसैनिक बलों को विशेष अधिकार देता है. चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के दौरान सेना को इस क़ानून के तहत गिरफ़्तारी, पूछताछ और जवाबी कार्रवाई के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं. इस क़ानून को वापस लेने के लिए राज्य में लंबे समय से आंदोलन चल रहा था और मणिपुरवासियों का कहना है कि सेना इसका दुरुपयोग कर रही थी. इसका और ज़ोरदार विरोध तब शुरू हुआ था जब एक स्थानीय महिला का कथित तौर पर सैनिकों ने बलात्कार किया था और उसकी हत्या कर दी थी. वहीं सेना का कहना है कि उन्हें राज्य में चरमपंथियों से निबटने के लिए अधिक से अधिक अधिकारों की ज़रूरत है. व्यापक अधिकार मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि राज्य सरकार ने राज्य की राजधानी इंफ़ाल के कुछ इलाक़ों से सेना हटाने का फ़ैसला किया है. सरकार की सिफ़ारिश है कि क़ानून इंफ़ाल घाटी के बाक़ी इलाक़ों और बर्मा की सीमा से लगे इलाक़ों में बना रहे. भारतीय रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने राज्य से ये क़ानून वापस लेने की संभावना से इनकार किया है. वैसे केंद्र सरकार असम राइफ़ल्स के कुछ सैनिकों को मणिपुर के उनके पारंपरिक ठिकाने से हटाकर 17 किलोमीटर दूर तैनात कर चुकी है. |
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