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मणिपुर में भारतीय सामानों का 'बहिष्कार' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्वोत्तर भारत के राज्य मणिपुर में सुरक्षाबलों को मिले विशेषाधिकार का विरोध करनेवाले 32 संगठनों ने राज्य में भारत के अन्य राज्यों की बनी चीज़ो के बहिष्कार का अभियान शुरू किया है. आंदोलनकारियों ने अपना आंदोलन मंगलवार से और तेज़ करने की घोषणा क है. इन संगठनों की ओर से एक प्रवक्ता ने बताया कि मणिपुरी लोगों की आकांक्षाओं के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनहीनता को देखते हुए उन्हें बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा. इससे पहले मणिपुर सरकार ने राजधानी इंफ़ाल के कुछ हिस्सों से विशेष क़ानून को हटाने की घोषणा की थी. लेकिन अब मुख्यमंत्री ने धमकी दी है कि अगर आंदोलन तेज़ किया गया तो वे इस क़ानून को फिर से लागू करने का फ़ैसला भी ले सकते हैं. लेकिन आंदोलनकारियों का माँग है कि यह क़ानून सिर्फ़ इंफ़ाल से ही नहीं बल्कि पूरे राज्य से हटाया जाए. बहिष्कार मणिपुर में भारत के अन्य राज्यों की बनी चीज़ों के बहिष्कार का ऐलान करनेवाले संगठन अपुन्बा लुप के प्रवक्ता धमेन सिंह ने बीबीसी को बताया कि बहिष्कार का क़दम मणिपुर से सशस्त्र सेनाओं के विशेषाधिकार की समाप्ति के लिए शुरू हुए अभियान का दूसरा चरण है. स्थानीय पत्रकारों के अनुसार मणिपुर के आम लोगों ने फ़िलहाल मिनरल वाटर, शीतल पेय और कुछ अन्य उपभोक्ता सामग्रियों का बहिष्कार शुरू कर दिया है. मणिपुर के कुछ आर्थिक विश्लेषकों की राय में मणिपुर में उद्योग काफ़ी कम हैं और ऐसे में बहिष्कार के कारण स्थानीय लोगों को चीन और थाईलैंड की ऐसी चीज़ों पर निर्भर होना होगा जिन्हें बर्मा से तस्करी के रास्ते मणिपुर लाया जा सकता है. लेकिन उनके अनुसार खाना पकाने की गैस और पेट्रोल आदि के लिए उन्हें दूसरे भारतीय राज्यों पर ही निर्भर रहना होगा. |
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