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दंगों के बंद मामलों की फिर जाँच होगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दंगों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के एक और फ़ैसले से गुजरात सरकार को झटका लगा है. सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार से कहा है कि वह पुलिस महानिदेशक के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय पुलिस समिति बनाए जो दंगों से जुड़े उन दो हज़ार मामलों की फिर से जाँच करे जिन्हें बंद कर दिया गया है. इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय कई बार गुजरात सरकार को फटकार लगा चुका है कि वह दंगों से जुड़े मामलों की ठीक तरह से जाँच नहीं कर रही है. दो मामलों की सुनवाई तो गुजरात राज्य से बाहर की जा रही है, इनमें से एक बेस्ट बेकरी कांड है और दूसरा बिलकीस बानो बलात्कार का मामला. गुजरात में फ़रवरी-मार्च 2002 में हुए दंगों में एक हज़ार से अधिक मुसलमानों को मार दिया गया था. इन दंगों के बाद कोई 4200 मामले पुलिस में दर्ज करवाए गए थे जिनमें से आधे यानी 2000 मामलों को पुलिस ने बंद कर दिया था. पुलिस ने इन मामलों को बंद करते हुए कहा था कि वे अपराधियों को नहीं ढूँढ़ पा रहे हैं. न्यायालय ने मंगलवार को गुजरात सरकार कहा है कि वह एक उच्च स्तरीय पुलिस समिति बनाए जो इन 2000 मामलों को फिर से देखे और तय करे कि इसमें आगे जाँच की आवश्यकता है या नहीं. न्यायालय ने कहा है कि पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता वाली यह समिति हर तीन महीने में सीधे न्यायालय को अपनी प्रगति रिपोर्ट दे. |
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