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बेस्ट बेकरी के लिए सरकारी वकील नियुक्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बेस्ट बेकरी मामले में सरकारी वकील की नियुक्ति का विवादित मसला आख़िरकार सुलझ गया है. सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में बने विशेष अदालत में पीआर वकील को सरकारी वकील नियुक्त कर दिया है. मंजुला राव, जिन्हें गुजरात सरकार ने विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया था, को सर्वोच्च न्यायालय ने को सरकारी वकील की सहायता करने को कहा है. महाराष्ट्र सरकार ने सर्वाच्च न्यायालय को चार नाम दिए थे, उन्हीं में से पीआर वकील की नियुक्ति की गई है. इस नियुक्ति के साथ एक तरह से बेस्ट बेकरी मामले से गुजरात सरकार का सीधा संबंध ख़त्म हो गया है. उल्लेखनीय है कि सरकारी वकील की नियुक्ति को लेकर महाराष्ट्र और गुजरात सरकार के बीच खींचतान चल रही की जिसकी वजह से इस मामले की सुनवाई नहीं हो पा रही थी. महाराष्ट्र सरकार का कहना था कि चूँकि सर्वोच्च न्यायालय ने यह मामला भेजा है इसलिए सरकारी वकील उनका होना चाहिए जबकि गुजरात सरकार इस मामले में अपना वकील चाहती थी. मामला गुजरात में मार्च 2002 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान बड़ोदरा शहर की बेस्ट बेकरी में आग लगा दी गई थी जिसमें वहाँ मौजूद सभी 14 लोग ज़िंदा जल गए थे.
इस मामले में 21 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था लेकिन एक स्थानीय अदालत ने उन सभी लोगों को रिहा कर दिया था. इसके बाद अभियुक्तों को फिर से गिरफ़्तारी करने के आदेश दिए गए थे. इसके बेस्ट बेकरी हमले में बच गई ज़ाहिरा शेख़ ने मामले की एकमात्र गवाह के रुप में सर्वोच्च न्यायालय जाकर दखल देने का अनुरोध किया था. सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले को गुजरात से हटाकर गुजरात ले जाने के आदेश दिए थे. अब पीड़ित ज़ाहिरा शेख़ के अनुरोध पर ही गुजरात सरकार के सरकारी वकील को बदला गया था. |
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