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राज्यों में मंत्रियों की छँटनी शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में केंद्र और राज्यों में मंत्रिपरिषद का आकार हाल के वर्षों में चिंता का विषय रहा है. कारण ये कि कुछ राज्यों में तो मंत्रियों की संख्या इतनी हो जाती है कि उन्हें सुविधाएं मुहैया कराना भी एक मुश्किल काम हो जाता है. केंद्र सरकार ने इस समस्या को हल करने के लिए संविधान में संशोधन किया है जिसके मुताबिक़ मंत्रिपरिषद का आकार लोकसभा या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होना चाहिए. पिछले साल दिसंबर में यह 91वाँ संवैधानिक संशोधन किया गया था जो सात जुलाई 2004 से लागू हो रहा है. संशोधन मे कहा गया है कि किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री को मिलाकर मंत्रिपरिषद का आकार विधान सभा की सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होगा लेकिन यह संख्या 12 से कम भी न हो. इसे देखते हुए कुछ राज्य सरकारों ने अपनी सदस्य संख्या घटाने की क़वायद शुरू भी कर दी है. इस क़ानून का मक़सद मंत्रिपद के लालच में दल-बदल पर रोक लगाना और सरकार का ख़र्च कम करना है. आसान नहीं सबसे ज़्यादा लोकसभा और विधानसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में मंत्रिपरिषद का आकार कम करने पर विचार के लिए बुधवार को बैठक हुई. इस बैठक में सभी मंत्रियों ने मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को अपने इस्तीफ़े सौंप दिए ताकि वह इस बारे में बिना कठिनाई के कोई निर्णय ले सकें. उत्तर प्रदेश सरकार में इस वक़्त 97 मंत्री हैं जिनमें से कम से कम 28 मंत्रियों को अपनी कुर्सी छोड़नी होगी. महाराष्ट्र में भी मंत्रियों ने अपने इस्तीफ़े मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे को सौंप दिए ताकि वह 65 में से 26 मंत्रियों से छुटकारा पा सकें.
शिंदे की नई मंत्रिपरिषद का गठन आसान काम नहीं होगा क्योंकि तीन महीने के बाद राज्य में चुनाव होना है. सरकार के सहयोगी दल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी दोनों ही मंत्रिपद पाने से ज़्यादा चुनाव पर अपना ध्यान लगाए हुए हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को मंत्रिपरिषद का आकार छोटा करना आसान काम नहीं होगा क्योंकि उन्हें सभी सहयोगी दलों को ख़ुश करना होगा. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता पहले ही विधायकों से अनुरोध कर चुके हैं वे राज्य के हित में काम करें. पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तरांचल के मुख्यमंत्रियों ने भी अपनी मंत्रिपरिषदों का आकार छोटा करने के लिए विचार विमर्श शुरू कर दिया है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मंत्रिपरिषदों का आकार छोटा करना आर्थिक सुधारों का ही एक हिस्सा है और इससे मंत्रि पद पाने के लालच में पार्टियाँ बदलने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी. |
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