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चिदंबरम ने कार्यक्रम को साहसिक बताया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के नए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि सत्तारुढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का न्यूनतम साझा कार्यक्रम आर्थिक सुधारों के लिए एक साहसिक क़दम है. चिदंबरम के इन विचारों को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि नई सरकार बहुत जल्दी ही नए बजट की तैयारी करने वाली है. चिदंबरम ने कहा, "साझा कार्यक्रम में आर्थिक सुधारों की पुष्टि की गई है और यह सुधारों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है." "मैं समझता हूँ कि यह बहुत ही साहसिक कार्यक्रम है और इससे मुझे वित्त मंत्री के रूप में काम करने के लिए नए-नए क़दम उठाने और रचनात्मक योजनाएं बनाने का काफ़ी मौक़ा मिलेगा." ग़ौरतलब है कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम में वार्षिक विकास दर सात से आठ प्रतिशत के बीच हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है. इस बारे में चिदंबरम ने कहा, "अगर कार्यक्रम को अगले पाँच साल तक कुशलतापूर्वक और असरदार तरीक़े से लागू किया जाता रहे तो आर्थिक सुधारों की साख और बढ़ेगी और लोग ज़्यादा ख़ुशहाल होंगे." चिदंबरम ने कहा कि सरकार कर ढाँचे को और व्यापक बनाना चाहती है ताकि सामाजिक और अन्य क्षेत्रों में ज़्यादा धन ख़र्च किया जा सके. उन्होंने कहा कि कृषि, बुनियादी और निर्माण क्षेत्रों में और ज़्यादा निवेश की ज़रूरत है. उन्होंने दोहराया कि सरकार उन सरकारी कंपनियों का विनिवेश नहीं करेगी जो फ़ायदे में चल रही हैं लेकिन उन्हें प्रबंधन स्वायत्ता मिलेगी और वे अगर चाहें तो पूंजी बाज़ार से धन जुटा सकती हैं. उन्होंने कहा कि भारत विदेशी निवेश का स्वागत करेगा और देश में हर साल दस से पंद्रह अरब डॉलर तक का विदेशी निवेश हो सकता है. चिदंबरम ने कहा है कि अगर इस साल मॉनसून अच्छा रहे तो विकास दर आठ प्रतिशत तक भी हासिल की जा सकती है. |
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