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अनुभवी व्यक्ति की ज़रूरत: जयवंतीबेन

जयवंतीबेन मेहता
जयवंतीबेन मेहता दो बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं
केंद्र सरकार में मंत्री रहीं और दक्षिण मुंबई सीट से भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी जयवंतीबेन मेहता का कहना है कि जनता को अनुभवी व्यक्ति की ज़रूरत है.

दरअसल 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मुरली देवड़ा को 10,243 मतों से हराकर संसद पहुँचने वाली जयवंतीबेन मेहता के सामने इस बार मिलिंद देवड़ा मैदान में हैं.

मुरली देवड़ा के पुत्र मिलिंद युवा हैं और परोक्ष रूप से जयवंतीबेन का निशाना उन्हीं की ओर था.

जयवंतीबेन इस चुनाव को ऐतिहासिक चुनाव बता रही हैं और राष्ट्रीय विकास के साथ ही दक्षिण मुंबई के विकास के दावों के साथ चुनाव मैदान में उतरी हैं.

उनका कहना है कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली इस सरकार के कार्यकाल में भारत की अस्मिता बढ़ी है, आर्थिक विकास हुआ है और जनता में विश्वास बढ़ा है कि वो जल्दी ही दुनिया की बराबरी में आ जाएँगे.

मुंबई का विकास

जयवंतीबेन इस बात से सहमत नहीं हैं कि मुंबई के छह सांसदों में से जो पाँच सांसद भाजपा-शिवसेना के थे उन्होंने मुंबई के विकास के लिए ख़ास काम नहीं किया है.

 यहाँ के लोगों को अनुभवी व्यक्ति की ज़रूरत है उन्हें प्रयोग करने से कोई फ़ायदा नहीं होगा.
जयवंतीबेन मेहता, भाजपा प्रत्याशी

उनके अनुसार जब भी ज़रूरत पड़ी भारत सरकार ने महाराष्ट्र सरकार को धन मुहैया कराया है.

जयवंतीबेन कहती हैं कि केंद्र सरकार ने मुंबई के आधारभूत ढाँचे के विकास के लिए 850 करोड़ रुपए, धारावी के विकास के लिए 500 करोड़ रुपए और मेगासिटी योजना के तहत 550 करोड़ रुपए दिलवाए हैं.

वह दक्षिण मुंबई को देश की आर्थिक जीवनरेखा बताती हैं और उनके अनुसार इस क्षेत्र के विकास से देश की व्यवस्था में सुधार होगा.

क्षेत्र के विकास के लिए उनका कहना है कि उन्होंने बांद्रा से वर्ली तक सी लिंक रोड की व्यवस्था का अनुमोदन करवाया और अब बांद्रा से नरीमन प्वाइंट के बीच सी लिंक रोड बनने से ट्रैफ़िक की समस्या में सुधार आएगा.

मतों का समीकरण

मिलिंद के पिता मुरली देवड़ा 1999 का लोकसभा चुनाव 10,243 मतों से हारे थे जबकि इसी क्षेत्र से खड़े समाजवादी पार्टी के अज़ीज़ लालानी को 19,128 मत मिले थे. यानी मतों के बँटवारे ने जयवंतीबेन की राह आसान कर दी थी.

अब ऐसे में इस बार माना जा रहा है कि क्षेत्र के अल्पसंख्यक मतदाताओं का कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में ध्रुवीकरण होता जा रहा है.

जब यही सवाल मैंने जयवंतीबेन के सामने रखा तो पहले तो उन्होंने कहा कि आप कांग्रेस एजेंट की तरह सवाल कर रहे हैं और फिर उन्होंने इन सभी संभावनाओं को ख़ारिज कर दिया.

मगर फिर भी जिस तरह जयवंतीबेन प्रचार में जुटी हैं मुक़ाबला कड़ा माना जा रहा है.

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