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गुरुवार, 08 अप्रैल, 2004 को 15:06 GMT तक के समाचार
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मोदी को इटली की संपत्ति पर आपत्ति

नरेंद्र मोदी की रैली
नरेंद्र मोदी को इस बात पर आपत्ति है कि सोनिया गाँधी की संपत्ति इटली में भी है
कहते हैं लोकतंत्र जनता की आवाज़ होती है मगर इसी लोकतंत्र में यदि जनता सीधे-सीधे अपने नेता से सवाल पूछ दे तो उसके साथ क्या सलूक़ हो सकता है इसका नज़ारा दिखा मुंबई की एक चुनावी सभा में.

उत्तर मध्य मुंबई क्षेत्र से शिवसेना नेता और भंग हो चुकी लोकसभा के अध्यक्ष मनोहर जोशी चुनाव मैदान में हैं.

उनकी एक चुनावी सभा में उनके भाषण के बाद एक व्यक्ति चिल्लाकर उनसे सवाल पूछने की ज़ुर्रत कर बैठा कि “आपने इस क्षेत्र के लिए क्या किया?” , बस फिर क्या था, उसे जवाब भी नहीं मिला और पुलिस ने उसे सभा स्थल से ही बाहर कर दिया.

बाहर ही नहीं किया बल्कि इस तरह से हटाया कि कहीं से भी कोई उससे संपर्क नहीं कर सके.

सभा में भीड़ बहुत नहीं थी और इसीलिए शायद उस व्यक्ति की आवाज़ सहज ही सुनाई भी पड़ गई. मगर पुलिस बल को ये बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने पूरी तत्परता दिखाते हुए उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया.

सोनिया फिर निशाने पर

कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे और जहाँ वह हों वहाँ भला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी का ज़िक्र कैसे न हो.

उन्होंने इस बार सोनिया गाँधी की संपत्ति को मुद्दा बनाया.

उनका कहना था कि भारतीय परिवार में लड़की विवाह के बाद पैतृक संपत्ति भूल जाती है मगर सोनिया गाँधी ने नामांकन के दौरान संपत्ति के हलफ़नामे में इटली की संपत्ति का उल्लेख भी किया है.

मोदी का कहना था कि पूरा देश ‘फ़ील गुड’ कर रहा है मगर पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ और कांग्रेस अध्यक्ष को ‘फ़ील गुड’ नहीं हो रहा.

उनका इशारा समझकर सभा में उपस्थित लोग नारेबाज़ी करने लगे और मोदी के चेहरे पर एक मुस्कान खेल गई.

भीड़ नदारद

माटुंगा क्षेत्र में हुई इस सभा में भीड़ काफ़ी कम थी और नेताओं के साथ ही कार्यकर्ताओं को भी इस बात की फ़िक्र थी कि इसका संदेश क्या जाएगा.

ख़ैर किसी तरह मोदी के आने तक उस छोटे से मैदान में लोग नज़र आने लगे थे. मगर सभा की समाप्ति के बाद तो आयोजकों और कार्यकर्ताओं में आरोपों का ज़बरदस्त घमासान हुआ.

सब एक दूसरे पर आरोप लगा रहे थे कि “इन्होंने कुछ नहीं किया, उन्होंने कुछ नहीं किया, इन्हें बताना चाहिए था, उन्हें कहना चाहिए था........... ”

भीड़ देखकर ही मुझे अंदाज़ा लग गया था कि सभा के बाद ये नज़ारा तो होगा ही इसलिए मैं आगे के लिए चल दिया.

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