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दक्षिणी वज़ीरिस्तान में शब्दों की लड़ाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से मिलने वाले क़बायली इलाक़े दक्षिणी वज़ीरिस्तान में सरकार और क़बायली सरदारों के बीच शब्दों की लड़ाई लड़ी जा रही है. शुक्रवार को सरकार ने हेलीकॉप्टरों के ज़रिए ऐसे पर्चे गिराए थे जिनमें स्थानीय लोगों से अनुरोध किया गया था कि वे अल क़ायदा के समर्थकों को इलाक़े से बारह भेजने के लिए राज़ी करें. उर्दू में छपे इन पर्चों में कहा गया था कि विदेशी लोग दक्षिणी वज़ीरिस्तान की मेहमाननवाज़ी की संस्कृति का दुरुपयोग कर रहे हैं और सेना वहाँ विकास कार्यक्रम चलाना चाहती है. शनिवार को क़बायलियों की तरफ़ से भी पर्चे बाँटे गए जिसमें पाकिस्तानी सैनिकों से अनुरोध किया गया कि वे अल क़ायदा के लड़ाकों के ख़िलाफ़ हथियार ना उठाएं. शहीद का दर्जा इन पर्चों पर मोटे अक्षरों में छपा है, "सैनिकों के लिए पैग़ाम" और इसमें क़ुरआन की कुछ आयतें लिखी और मुसलमान भाइयों के ख़िलाफ़ लड़ाई छेड़ने के लि सेना की आलोचना की गई है.
इन पर्चों में सैनिकों से अपील की गई है कि वे भी अमरीका और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ जेहाद में शामिल हो जाएं और जो इस लड़ाई में जान देंगे उन्हें शहीद का दर्जा मिलेगा. ऐसा लगता है कि उर्दू में बाँटे गए इन पर्चों को कंप्यूटर पर तैयार किया गया है और वज़ीरिस्तान क़बीले की तरफ़ से बाँटने का दावा किया गया है. लेकिन एक स्थानी क़बायली सरदार ने कहा है कि ये पर्चे उनके ख़यालों का प्रतिनिधित्व नहीं करते और संभवतः यह काम अल क़ायदा का है. |
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