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पाकिस्तान में विपक्ष ने सरकार को घेरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि संदिग्ध अल क़ायदा चरमपंथियों के ख़िलाफ दक्षिण वज़ीरिस्तान में चलाए जा रहे सैनिक अभियान के नाम पर क़बायलियों को निशाना बनाया जा रहा है. सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है. पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मंत्री फैसल सालेह हयात ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया कि उस इलाक़े में विदेशी चरमपंथियों के नाम की आड़ में स्थानीय क़बायली लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. फ़ैसल सालेह हयात पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर चल रहे सैनिक अभियान के बारे में नेशनल एसेम्बली में एक बहस के दौरान विपक्ष के सवालों का जवाब दे रहे थे. उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते वाना में शुरू हुए इस अभियान में अब तक 20 चरमपंथी मारे जा चुके हैं. उन्होंने ये भी दावा किया कि 30 से ज़्यादा चरमपंथियों के शव अब भी उस इलाक़े में पड़े हैं. हालाँकि उन्होंने ये साफ़ नहीं बताया कि इस लड़ाई में सेना के कितने जवान मारे गए हैं. आरोप इससे पहले विपक्ष के कई नेताओं ने सेना पर इन क़बायली इलाक़ों में स्थिति को बदतर बनाने का आरोप लगाया था.
छह पार्टियों के राजनीतिक गठबंधन एमएमए ने मुसलमानों के मारे जाने की इस कार्रवाई को इस्लाम विरोधी बताया. कुछ पार्टियों ने तो इसकी तुलना 1971 में पूर्वी पाकिस्तान के हालात से कर दी, जिसके बाद बांग्लादेश बना था. लेकिन आंतरिक रक्षा मंत्री ने इसे ख़ारिज करते हुए कहा कि ये अभियान केवल उन विदेशी तत्वों के ख़िलाफ़ है जो पाकिस्तान की ज़मीन से पड़ोसी देशों में आतंक फैला रहे हैं. स्थिति उधर वाना मे गुरूवार को मोटे तौर पर शांति रही. सुरक्षाबलों ने इलाक़े की घेराबंदी कर रखी है. पाकिस्तान सरकार ने अर्द्धसैनिक बलों के 12 जवानों की रिहाई के लिए चरमपंथियों को गुरूवार सुबह तक का समय दिया था. बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि अभी तक उस तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया है. हाँलाकि सेना की कोशिश है कि मामला शांतिपूर्ण ढंग से ही सुलझ जाए. दक्षिणी वज़ीरिस्तान क़बायली इलाक़ा है और यहाँ लगभग क़बायली बुज़ुर्गों के दो दल चरमपंथियों को समझाने की कोशिश में लगे हुए हैं. एक दल में 50 प्रतिनिधि हैं और दूसरे में 20. दोनों ही दलों का कहना है कि उन्हें और समय चाहिए. उधर कब़ायलियों का कहना है कि सैन्य अधिकारियों ने वादा किया है कि वे तब तक गोली नहीं चलाएंगे जब तक दूसरी तरफ़ से हमले की पहल न हो. मगर ऐसा लगता है कि पाकिस्तानी सेना औरव मदद का इंतज़ार कर रही है. इसी सप्ताह एक सैनिक काफ़िले पर हमले में 11 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने से सेना को काफ़ी नुकसान पहुँचा था. पाकिस्तानी सेना ने पिछले 10 दिनों से इस इलाक़े में अल क़ायदा और तालिबान के चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया हुआ है. |
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