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चरमपंथियों के सामने समयसीमा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान से लगे दक्षिणी वज़ीरिस्तान इलाक़े में 12 अर्धसैनिक बलों की रिहाई के लिए चरमपंथियों को गुरूवार सुबह तक का समय दिया था. लेकिन ये समयसीमा अब पूरी हो गई है. उधर इस इलाक़े के क़बायली बुज़ुर्गों के दो प्रतिनिधिमंडल चरमपंथियों को समझाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. पाकिस्तानी सेना ने पिछले 10 दिनों से इस इलाक़े में अल क़ायदा और तालिबान के चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाया हुआ है. अधिकारियों का कहना है कि इस क्षेत्र में सैकड़ों चरमपंथी घिर गए हैं. स्थिति बुधवार को इस इलाक़े में मोटे तौर पर शांति रही. वैसे छिटपुट गोलीबारी की आवाज़ सुनाई दी और हेलिकॉप्टरों से गश्त जारी रही. सैन्य अधिकारियों ने अभी ये नहीं बताया है कि अगर चरमपंथियों ने तय समयसीमा के भीतर सुरक्षाबलों को रिहा नहीं किया तो वे क्या करेंगे. मगर ऐसा लगता है कि पाकिस्तानी सेना पिछली बार की तरह कोई बड़ा अभियान शुरू करने से हिचक रही है क्योंकि पिछले दिनों चरमपंथियों ने उन्हें करारा जवाब दिया था. उन्होंने इस सप्ताह एक सैनिक काफ़िले पर हमला किया था जिसमें 12 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे. बातचीत दक्षिणी वज़ीरिस्तान क़बायली इलाक़ा है और यहाँ लगभग क़बायली बुज़ुर्गों के दो दल चरमपंथियों को समझाने की कोशिश में लगे हुए हैं. एक दल में 50 प्रतिनिधि हैं और दूसरे में 20. दोनों ही दलों का कहना है कि उन्हें और समय चाहिए. |
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