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वज़ीरिस्तान में फिर सैनिक अभियान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से मिलने वाले क़बायली इलाक़े दक्षिणी वज़ीरिस्तान में सेना एक विशेष अभियान चला रही है. इस अभियान के तहत हेलीकॉप्टरों के ज़रिए ऐसे पर्चे गिराए जा रहे हैं जिनमें स्थानीय लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे अल क़ायदा के समर्थकों को इलाक़े से बारह भेजने के लिए राज़ी करें. उर्दू में छपे इन पर्चों में कहा गया है कि विदेशी लोग दक्षिणी वज़ीरिस्तान की मेहमाननवाज़ी की संस्कृति का दुरुपयोग कर रहे हैं और सेना वहाँ विकास कार्यक्रम चलाना चाहती है. दूसरी तरफ़ वाना में पाकिस्तानी अधिकारियों ने स्थानीय क़बायली सरदारों के साथ आम बैठक यानी जिरगा की है. अधिकारियों ने बताया है कि ज़ेलीख़ेल क़बीले के सरदार इलाक़े में छुपे हुए विदेशियों को सेना को सौंपने में सहयोग करने के लिए राज़ी हो गए हैं. इस बीच महसूद क़बीले के सशस्त्र लश्कर (क़बीले की सेना) ने उन लोगों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया है जिन्होंने पिछले हफ़्ते पाकिस्तान सेना के एक काफ़िले पर हमला किया था. उस हमले में नौ सैनिक मारे गए थे. यह अभियान दक्षिणी वज़ीरिस्तान के सरोकी इलाक़े में चलाया जा रहा है जहाँ महसूद क़बायली समुदाय का बहुमत है. क़बीले में परंपरा है कि अगर वहाँ कोई अपराध होता है तो उसकी ज़िम्मेदारी पूरे क़बीले पर होती है. क़बायली सरदारों ने बताया है कि घर-घर तलाशी लेने के इस अभियान में क़रीब छह हज़ार लोग लगाए गए हैं. एक क़बायली सरदार नूर आलम ख़ान ने बताया है कि सरोकी इलाक़े में घर-घर की तलाशी ली जा रही है और लोगों से इस काम में मदद के लिए कहा जा रहा है.
नूर आलम ख़ान ने कहा कि वे विदेशियों को अपनी ज़मीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं करने देंगे. ग़ौरतलब है कि पाकिस्तानी सेना के एक काफ़िले पर पिछले सप्ताह उस समय घात लगाकर हमला किया गया था जब वह वाना इलाक़े में एक बड़े अभियान में भाग लेने के लिए जा रहा था. उस समय वाना इलाक़े में अल क़ायदा और तालेबान के संदिग्ध लड़ाकों के ख़िलाफ़ एक अभियान चलाया जा रहा था. अभी यह पता नहीं चला है कि वह हमला उस बड़े अभियान से नाराज़ क़बायलियों ने किया था या उस हमले के पीछे किन्हीं विदेशियों का हाथ था. सरोकी एक अर्द्ध स्वायत्त इलाक़ा है और नियमों के मुताबिक़ वहाँ के क़बायलियों को सरकार के ख़िलाफ़ किसी हमले में शामिल लोगों की तलाश में सरकार की मदद करना ज़रूरी है. आम माफ़ी इस बीच पाकिस्तान सरकार ने अल क़ायदा से जुड़े विदेशियों को आम माफ़ी देने की पेशकश फिर से दोहराई है. पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत के गवर्नर लैफ़्टिनेंट जनरल सैयद इफ़्तिख़ार हुसैन शाह ने क़बायली जिरगा में यह पेशकश दोहराई. गवर्नर ने कहा कि विदेश अगर आत्मसमर्पण कर दें और उन्हें पनाह देने वाले क़बीले यह हलफ़नामा दें कि वे किसी हिंसक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे तो उन्हें अपने परिवारों के साथ इलाक़ा छोड़ने कि इजाज़त दी जा सकती है. गवर्नर इफ़्तिख़ार हुसैन शाह ने यह भी कहा कि अल क़ायदा के वाँछित लड़ाके वाना में सैनिक अभियान से बच निकले हैं और किसी और इलाक़े में चले गए हैं. |
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