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सोमवार, 05 जनवरी, 2004 को 18:38 GMT तक के समाचार
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पाकिस्तानियों को शांति की उम्मीद

वाजपेयी और मुशर्रफ़
क़रीब ढाई साल बाद वाजपेयी और मुशर्रफ़ के बीच बातचीत हुई

भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच मुलाक़ात से दोनो देशों के संबंध अच्छे होने की उम्मीदें जगी हैं.

पाकिस्तान में बहुत से लोग चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच लोगों के आने-जाने की ज़्यादा छूट हो, कारोबार बढ़े, खेल के साथ-साथ सांस्कृतिक स्तर पर भी संपर्क बढ़ें.

वाजपेयी और मुशर्रफ़ की मुलाक़ात पर पाकिस्तान के दूसरे बड़े शहर लाहौर में काफ़ी गर्मजोशी का माहौल है.

एक कारोबारी मोहम्मद आरिफ़ कहते हैं, "मैं इस पर बहुत उत्साहित हूँ कि भारतीय प्रधानमंत्री पाकिस्तान में हैं."

"दोनों देशों के बीच सीमा खुल जानी चाहिए."

बढ़ती उम्मीदें

लाहौर को पाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है. पूरे लाहौर में उत्साह का माहौल देखा गया.

भारतीय लोग काफ़ी लोकप्रिय हैं पाकिस्तान में

बाज़ार में घूमते हूए एक सज्जन खावर और उनकी बेटी आयशा से मुलाक़ात होती है जो ख़रीददारी कर रहे थे.

वे कहते हैं, "हमें देखिए, हम क्या भारतीयों से कुछ अलग नज़र आते हैं, क्या हममें कुछ फ़र्क़ है."

"लेकिन भारतीय फ़िल्मों पर नज़र डालें तो हर दूसरी फ़िल्म में पाकिस्तानियों को विलेन यानी ख़लनायक के रूप में पेश किया जाता है."

ख़ावर और आयशा कहते हैं कि हम पाकिस्तानियों और हिंदुस्तानियों ने एक दूसरे के बारे में बहुत सी ग़लतफ़हमियाँ पाल रखी हैं. हमें इन्हें अपने दिलों से निकालना होगा."

सलीम लाहौर के एक बाज़ार में एक रेस्तराँ में रसोइया हैं और कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान को अपने तमाम मतभेद दूर कर देने चाहिए.

सलीम कहते हैं, "देखिए ना, हम अपने मतभेदों की वजह से कहाँ से कहाँ आ गए हैं. जो धन लोगों की बेहतरी के लिए ख़र्च किया जा सकता है वह हथियारों पर ख़र्च किया जा रहा है. दुनिया आगे जा रही है, भला हम पीछे क्यों रहें?"

सांस्कृतिक धागे

रेस्तराँ के पास ही कैसेटों की एक दुकान है जिसमें भारतीय फ़िल्मों की अभिनेत्रियों की बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगी हुई हैं, अनोखी बात ये कि ये तस्वीरें पाकिस्तान के बड़े स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर के बीच ही है.

दुकान के मालिक नफ़ीस कहते हैं कि वे ताज़ा भारतीय गानों और फ़िल्मों की कैसेट तस्करी के ज़रिए दुबई से मंगाते हैं.

"मैं हर सप्ताह हज़ारों कैसेट बेचता हूँ. यहाँ बॉलीवुड की फ़िल्मों के लिए ज़बरदस्त लगाव है."

नफ़ीस बताते हैं कि पिछले महीने उर्मिला मातोंडकर लाहौर में थी तो भीड़ देखने लायक थी. उसकी एक झलक पाने के लिए लोगों में होड़ मची हुई थी.

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