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दोनों प्रधानमंत्रियों की सीधी बातचीत हुई
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ज़फ़रुल्ला ख़ान जमाली के साथ द्विपक्षीय बातचीत हुई है. दो साल में पहली बार दोनों देशों के नेताओं की सीधी बातचीत हुई है. भारत के विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा की भी पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़ुर्शीद महमूद कसूरी से मुलाक़ात हुई है. सिन्हा ने इस मुलाक़ात के बाद बताया कि प्रधानमंत्री वाजपेयी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की बातचीत शिष्टाचार के नाते हुई है और इसी शिष्टाचार के नाते भारतीय प्रधानमंत्री पाकिस्तान के राष्ट्रपति से भी मिलना चाहते हैं. कसूरी से मुलाक़ात के बारे में उन्होंने बताया, "ये एक शिष्टाचार के नाते मुलाक़ात थी और उसमें दोनों देशों के संबंधों के सुधार की दिशा में आई गति को बनाए रखने के तरीक़ों पर चर्चा हुई." बीबीसी के एक संवाददाता के अनुसार वाजपेयी और जमाली की मुलाकात इस्लामाबाद के जिन्ना कन्वेंशन सेंटर में हुई. भारतीय प्रधानमंत्री दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन, सार्क की शिखर बैठक के लिए इस्लामाबाद में हैं. वाजपेयी का भाषण
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने दोनों नेताओं की बैठक की जानकारी दी, लेकिन यह नहीं बताया गया है कि किन विषयों पर बातचीत हुई है. पाकिस्तान के सरकारी टेलीविज़न पर दोनों नेताओं की बातचीत की छोटी-सी क्लिप भी दिखाई गई है. शुरुआत इससे पहले रविवार को सार्क के 12वें शिखर सम्मेलन की शुरुआत हुई. बड़े सौहार्द्रपूर्ण माहौल में सारी औपचारिकताएँ सम्पन्न हुईं और अब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री जमाली इस सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे.
सभी सात सदस्य देशों ने इस बात की सराहना की कि 18 वर्षों की लंबी अवधि के बाद सार्क ने मुक्त व्यापार का क्षेत्र तैयार करने के मसौदे पर सहमति के ज़रिए अपना अस्तित्व और पहचान तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम उठाया है. सभी देशों के नेताओं ने ग़रीबी, बीमारी और भूख से लड़ने के लिए आपसी सहयोग के महत्व पर ज़ोर दिया. भारतीय प्रधानमंत्री वाजपेयी ने भी अपने संक्षिप्त भाषण में भी शांति के माहौल से हो सकने वाले फ़ायदों पर ध्यान दिया. उन्होंने कहा कि भारत तथा पाकिस्तान को आपसी मतभेदों से ज़्यादा अपने समान इतिहास और अन्य समानताओं का फ़ायदा उठा कर राजनीतिक समस्याओं से ऊपर उठना चाहिए. वाजपेयी ने कहा, "मैंने इस्लामाबाद में घुसते ही एक रोड साइन देखा जिस पर लिखा था कि 'टुगेदर वी स्टैंड ए बेटर चांस इन द वर्ल्ड' यानी एक साथ ही हमें दुनिया में सफल होने की संभावना है. यह एक सच्चाई है जो सार्क नहीं समझ पाया है." |
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