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रविवार, 04 जनवरी, 2004 को 17:14 GMT तक के समाचार
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अब कश्मीर से ज़रा कुछ हटकर
वाजपेयी-जमाली
दोनों देशों के नेताओं के बीच दो साल में पहली बार औपचारिक बातचीत हुई है

दक्षिण एशियाई देशों का क्षेत्रीय संगठन सार्क अक्सर भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों की वजह से द्विपक्षीय मंच बनता रहा है.

पाकिस्तान सार्क मंच पर कई बार कश्मीर मुद्दा उठाता रहा है.

भारत कहता रहा है कि सार्क क्षेत्रीय मंच है और इस पर द्विपक्षीय मुद्दे नहीं उठाए जाने चाहिए.

लेकिन इस बार कुछ ऐसा हुआ कि न तो पाकिस्तान ने और न ही भारत ने सार्क मंच पर कश्मीर मुद्दे को छुआ.

दोनों ही देशों के प्रधानमंत्रियों ने अपने भाषणों में न सिर्फ़ दक्षिण एशियाई क्षेत्र के आर्थिक विकास पर ज़्यादा ज़ोर दिया बल्कि दोनों के भाषणों में कुछ मुद्दों पर एक राय भी नज़र आई.

मुद्दा आर्थिक विकास का

वाजपेयी ने कहा कि दो साल पहले काठमाँडू में हुए सम्मेलन में दक्षिण एशिया क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास पर ध्यान केंद्रित करने पर ज़ोर दिया गया था.

"पिछले सम्मेलन के बाद से जो कुछ प्रगति की गई है उसे संतोषजनक कहा जा सकता है."

वाजपेयी ने कहा कि क्षेत्र के देशों को व्यापार के लिए वरीयता देने के मामले में कुछ प्रगति हुई है जिसके लिए क्षेत्र में एक मुक्त व्यापार के समझौते के लिए भी बुनियादी ढाँचा तैयार कर लिया गया है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मीर ज़फ़रुल्ला ख़ान जमाली ने भी कुछ इसी तरह के विचार व्यक्त किए.

आतंकवाद के ख़िलाफ़

 हम आतंकवाद का मुक़ाबला करने के लिए एक अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर सहमत हो गए हैं जो आतंकवाद के ख़िलाफ़ 1987 के समझौते से आगे संतोषजनक प्रगति है

वाजपेयी

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के देशों को दुनिया में आर्थिक उदारीकरण से पैदा हुई चुनौतियों का मुक़ाबला करने के लिए एकजुट होकर रणनीति बनानी चाहिए.

जमाली ने आर्थिक क्षेत्र में व्यापक सहयोग का आहवान करते हुए कहा कि व्यापार में सार्क सदस्य देशों को वरीयता देने के मामले में दक्षिण एशियाई व्यापार प्राथमिकता समझौता 'साप्टा' के चार दौर में संतोषजनक प्रगति हुई है.

"अब दक्षिण एशिया क्षेत्र में मुक्त व्यापार समझौते 'साफ़्टा' का अंतिम मसौदा तैयार किया जाना भी एक अहम क़दम है."

जमाली ने कहा कि क्षेत्र में जारी राजनीतिक मतभेदों ने आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर गहरा असर डाला है.

हालाँकि जमाली ने यह भी कहा कि अगर क्षेत्र की राजनीतिक समस्याओं पर यथार्थवादी नज़रिए से ध्यान नहीं दिया गया तो दक्षिण एशिया आर्थिक संघ या एक वित्त कोष या फिर शेन्गेन देशों की तर्ज़ पर किसी संगठन का बनाया जाना सिर्फ़ एक ख़्वाब ही रह जाएगा.

वाजपेयी ने भी कहा कि यूरोपीय संघ एक राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा है और आसियान ने भी राजनीतिक समस्याओं को अपने आर्थिक एजेंडे पर हावी नहीं होने दिया है.

उन्होंने कहा कि अफ्रीका, दक्षिणी अमरीका और कैरीबियन देशों में भी आर्थिक सहयोग तेज़ी से बढ़ा है.

"हमें भी इन मिसालों से सीख लेते हुए दक्षिण एशिया में राजनीतिक मतभेदों को पीछे छोड़ आर्थिक प्रगति पर ध्यान देना चाहिए."

आतंकवाद

'आतंकवाद' के बारे में क्षेत्रीय प्रोटोकॉल के मसौदे को अंतिम रूप दिए जाने पर दोनों नेताओं का ध्यान गया.

संकल्प

 यह दक्षिण एशिया क्षेत्र से आतंकवाद का ख़ात्मा करने के लिए हमारा संकल्प दिखाता है

जमाली

जमाली ने इस बारे में कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद का मुक़ाबला करने के बारे में अतिरिक्त प्रोटोकॉल का स्वागत करता है.

"यह दक्षिण क्षेत्र से आतंकवाद का ख़ात्मा करने के लिए हमारा संकल्प दिखाता है."

वाजपेयी ने यह सुझाव दिया कि सार्क सदस्य देशों के लोगों को एक दूसरे के यहाँ बिना किसी बाधा के आने-जाने की छूट देनी चाहिए लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ग़ैर क़ानूनी घुसपैठ को रोका जाना चाहिए.

अटल बिहारी वाजपेयी ने क्षेत्र में ग़रीबी दूर करने के लिए एक कोष बनाए जाने का सुझाव देते हुए कहा कि अगर इस पर सहमति हो जाती है तो भारत इसके लिए दस करोड़ डॉलर का शुरुआती योगदान देने को तैयार है.

वाजपेयी ने सूचना तकनीक और संपर्क की ज़रूरत बताते हुए सुझाव दिया कि इसके लिए एक सार्क टास्क फ़ोर्स बनाई जा सकती है जो सार्क देशों के बीच सड़क, रेल, हवाई और जल यातायात शुरू करने का काम देखे.

वाजपेयी ने सूचना तकनीक में भी सहयोग का आहवान किया.

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