|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वाजपेयी और मुशर्रफ़ ने बातचीत की
भारत के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने सोमवार को घंटे भर तक बातचीत की है. रविवार को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ज़फ़रुल्लाह जमाली की बातचीत हुई थी और दो वर्ष बाद दोनों देशों के नेताओं ने आमने-सामने बैठ कर बात की थी. आज की यह मुलाक़ात सार्क सम्मेलन के दौरान इस्लामाबाद में हुई. सम्मेलन की शुरुआत से ही इसको लेकर अटकलें तेज़ थीं. इससे थोड़ी देर पहले प्रधानमंत्री वाजपेयी ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के आवासीय परिसर की नींव रखी.
इस मौक़े पर उनका कहना था, "मुझे यक़ीन है कि आज मैं जिस इमारत की नींव रख रहा हूँ वह ठोस बुनियाद पर खड़ी रहेगी और हर तरह के मौसम का मुक़ाबला करेगी. चाहे वह आँधी हो या पानी". "मुझे यह भी विश्वास है कि यहाँ बैठने वाले सभी ज़िम्मेदारियों को पूरा करेंगे और पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारना एक बड़ी ज़िम्मेदारी है". उनका कहना था कि यह महत्वपूर्ण है कि दोनों देशों को समुचित प्रतिनिधित्व मिले. संवाद जारी रहे और हम मिल कर साथ काम करते रहें. बीबीसी संवाददाता सीमा चिश्ती का कहना है कि लगभग इसी जगह वाजपेयी ने अब से 25 साल पहले चांसरी की नींव रखी थी. उस समय वह भारत के विदेश मंत्री थे. सोमवार की इस बैठक को लेकर आशावाद के बावजूद दोनों देशों के नेता इस बात को लेकर सतर्क हैं कि इससे बहुत ज़्यादा अपेक्षाएँ न की जाएँ. इस्लामाबाद में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि कश्मीर की समस्या इतनी जटिल है कि उसका इक्का-दुक्का मुलाक़ातों में हल निकलना मुश्किल है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||