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वाजपेयी-मुशर्रफ़ मुलाक़ात का स्वागत
वाजपेयी और मुशर्रफ़
क़रीब ढाई साल बाद वाजपेयी और मुशर्रफ़ के बीच बातचीत हुई

भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच पाँच जनवरी को इस्लामाबाद में मुलाक़ात से दुनिया में कई जगह इन दोनों देशों के संबंध अच्छे होने की उम्मीदें जगी हैं.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान, अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन ने इस मुलाक़ात का स्वागत किया है.

कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि परमाणु संपन्न देशों में तनाव छोड़कर शांति की नई उम्मीद बंधी है.

कोफ़ी अन्नान के प्रवक्ता फ्रेड एकहार्ड ने कहा, "वह समझते हैं कि इस मुलाक़ात से दोनों देशों के बीच तमाम मुद्दों को सुलझाकर शांति की तरफ़ बढ़ने का रास्ता साफ़ होता है."

"महासचिव कोफ़ी अन्नान ने दोनों देशों से गुज़ारिश की है कि वे इस तरह के क़दम उठाते रहें और उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे ठोस बातचीत भी आगे बढ़ेगी."

अमरीका

अमरीका ने वाजपेयी और मुशर्रफ़ की मुलाक़ात पर पहली प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि ऐसी मुलाक़ातों का सिलसिला जारी रहेगा.

अमरीका विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, "अमरीका यह देखकर बहुत ख़ुश है कि प्रधानमंत्री वाजपेयी और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के बीच मुलाक़ात हुई है."

"हम यह देखकर भी बहुत ख़ुश हैं कि दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच भी मुलाक़ातें हुई हैं. हम उम्मीद करते हैं कि ऐसी मुलाक़ातें जारी रहेंगी और इनसे किसी ठोस बातचीत का रास्ता साफ़ होगा."

ब्रिटेन और फ्रांस

ब्रिटेन और फ्रांस ने भी वाजपेयी-मुशर्रफ़ मुलाक़ात का स्वागत करते हुए कहा है कि दोनों नेताओं को ऐसी मुलाक़ातें जारी रखनी चाहिए.

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने वाजपेयी-मुशर्रफ़ मुलाक़ात को एक महत्वपूर्ण क़दम बताया है.

"हम वाजपेयी और मुशर्रफ़ मुलाक़ात का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं और साथ ही उम्मीद करते हैं कि दोनों देश अपने संबंध सुधारने की दिशा में लगातार कोशिश करते रहेंगे."

फ्रांस के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता हर्व लैडसाउस ने पत्रकारों से कहा, "फ्रांस भारत और पाकिस्तान के इस क़दम पर गर्मजोशी से मुबारकबाद देता है, ख़ासतौर से पिछले सात महीनों में दोनों देशों ने सराहनीय प्रगति की है."

"फ्रांस सरकार यह उम्मीद करती है कि भारत और पाकिस्तान ऐसी मुलाक़ातें और बातचीत जारी रखते हुए शांति के ठोस रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं."

रूस और चीन

रूस और चीन ने दोनों देशों के नेताओं के बीच मुलाक़ात का स्वागत किया है जबकि कुछ कश्मीरी संगठनों ने यह कहते हुए आलोचना की है कि कश्मीरी लोगों की अनदेखी की गई है.

 रूस को उम्मीद है कि इस मुलाक़ात से दोनों देशों के बीच व्यापक बातचीत का रास्ता खुलेगा और दोनों देशों के बीच तमाम समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलेगी

रूसी विदेश मंत्रालय

रूस के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी अलेक्ज़ांद्र यकोवेन्को ने कहा, "रूस को उम्मीद है कि इस मुलाक़ात से दोनों देशों के बीच व्यापक बातचीत का रास्ता खुलेगा और दोनों देशों के बीच तमाम समस्याओं को सुलझाने में मदद मिलेगी."

"दोनों देशों की बातचीत से ही दक्षिण एशिया क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा की बुनियादें मज़बूत करने में मदद मिल सकती है."

चीन ने वाजपेयी और मुशर्रफ़ की मुलाक़ात का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे परमाणु संपन्न दोनों देश शांति की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे.

चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता कोंग क्वान ने कहा, "चीन आशान्वित है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश क्षेत्रीय स्थिरता, विकास और शांति की दिशा में एकजुट होकर प्रयास कर सकेंगे."

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