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ओपेक ने उत्पादन घटाने का फ़ैसला टाला | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तेल निर्यातक देशों के संगठन 'ओपेक' ने कच्चे तेल का उत्पादन मौजूदा स्तर पर स्थिर रखने का फ़ैसला किया है. इससे कीमतें बढ़ने की आशंका कम हो गई है. ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में ओपेक देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक में रविवार को ये फ़ैसला किया गया. कुछ देशों ने उत्पादन घटाने के लिए दबाव डाला लेकिन अन्य देशों ने कहा कि पहले भी उत्पादन कम किया गया था और उसके असर को देखने के बाद ही इस पर कोई फ़ैसला किया जाए. पिछले एक वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें एक समय 147 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचने के बाद 40 डॉलर प्रति बैरल तक गिर चुकी है. बैठक में कहा गया कि पिछले साल सितंबर में प्रति दिन 42 लाख बैरल उत्पादन घटाने का फ़ैसला हुआ था लेकिन अभी इस लक्ष्य में सिर्फ़ 80 फ़ीसदी कटौती संभव हो सकी है. इसलिए इस बात पर ज़ोर दिया गया कि उत्पादन घटाने के पूर्व लक्ष्य को पहले हासिल किया जाए और फिर आगे के बारे में सोंचा जाए. ओपेक ने 28 मई को अगली बैठक बुलाने का फ़ैसला किया है और उस दिन इस बात की फिर समीक्षा होगी कि उत्पादन और घटाने की ज़रूरत है या नहीं. अल्जीरिया, वेनेज़ुएला और क़तर उत्पादन कटौती के पक्ष में थे. विशेषज्ञ ये चेतावनी दे रहे थे कि तेल उत्पादन में फिर से कटौती का उलटा असर हो सकता है, इससे ख़राब वैश्विक अर्थव्यवस्था और बिगड़ सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें तेल की क़ीमतों पर ओपेक की चर्चा15 मार्च, 2009 | पहला पन्ना ओपेक का तेल उत्पादन बढ़ाने का फ़ैसला03 जून, 2004 | पहला पन्ना ओपेक की बैठक में तेल उत्पादन बढ़ाने पर विचार03 जून, 2004 | पहला पन्ना तेल की कीमतों का ऊपर जाना जारी25 मई, 2004 | पहला पन्ना अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल के दाम चढ़े08 अप्रैल, 2002 | पहला पन्ना तेल-उत्पादन में कटौती 28 दिसंबरजनवरी, 2001 | पहला पन्ना तेल निर्यात में कटौती 28 दिसंबरजनवरी, 2001 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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