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ओपेक की बैठक में तेल उत्पादन बढ़ाने पर विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले दिनों में तेल की क़ीमतों में आई रिकॉर्ड उछाल के बाद तेल निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) की आज लेबनान की राजधानी बेरुत में बैठक हो रही है. सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हुए चरमपंथी हमलों के बाद से तेल की क़ीमतें दो दशकों में सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गईं. इसके बाद दुनिया के सभी बड़े देशों ने तेल का उत्पादन करने वाले देशों से अनुरोध किया है कि वे तेल का उत्पादन बढ़ाएँ. इस बैठक में तेल का उत्पादन बढ़ाने पर ही मुख्य रुप से चर्चा होगी. कुछ तेल उत्पादक देशों ने, जिसमें सऊदी अरब भी शामिल है, तेल का उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है जिससे कि तेल की क़ीमतें नियंत्रण में रहें. उम्मीद की जा रही है कि ओपेक की बैठक में उत्पादन बढ़ाने का फ़ैसला लिया जाए. हालांकि सऊदी अरब का यह भी मानना है कि क़ीमत बढ़ने का संबंध तेल की आपूर्ति से नहीं है बल्कि इस आशंका से है कि यदि मध्यपूर्व के देशों में और चरमपंथी हमले हुए तो तेल की आपूर्ति में कमी आ सकती है. बीबीसी के आर्थिक मामलों के संवाददातों का कहना है कि तेल व्यापारियों को डर है कि यदि मध्यपूर्व में सुरक्षा की स्थिति बिगड़ती है तो तेल की आपूर्ति में गंभीर बाधाएँ खड़ी हो जाएँगी. |
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