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तेल की कीमतों का ऊपर जाना जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतें एक बार फिर ऊपर चली गई हैं. इस सप्ताहांत कीमतों पर नियंत्रण रखने की कोशिशें की गई थीं मगर उसके बावजूद कीमतें नीची नहीं रह सकीं. अमरीका में कच्चे तेल की कीमत पिछले 21 वर्षों के सबसे ऊँचे स्तर तक पहुँच चुकी है. दुनिया के सात धनी देशों के समूह जी-7 के वित्तमंत्रियों ने तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक से आग्रह किया था कि वह तेल का उत्पादन बढ़ाए. सऊदी अरब इसके लिए तैयार हो गया था मगर ओपेक के अन्य सदस्य इसके लिए ख़ास उत्सुक नहीं दिखे. कारण बीबीसी के एक संवाददाता का कहना है कि तेल की कीमतों को नीचे लाने के लिए की गई कोशिशों को इराक़ और सऊदी अरब में लगातार जारी हिंसा के कारण धक्का लगा. उसपर से बाज़ार में ऐसी कोई उम्मीद नहीं है कि ओपेक बहुत जल्दी दाम कम करने के बारे में कुछ कर पाएगा. इराक़ में एक तेल पाइपलाइन पर हमला किया गया और सऊदी अरब में भी हिंसा की घटना हुई. संवाददाता का कहना है कि वास्तव में देखने पर तेल की कीमतें पिछले समय के हिसाब से उतनी ऊँची नहीं गई हैं मगर इनका लगातार बढ़ते रहना आर्थिक विकास के लिए सही नहीं है. |
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