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मनास अड्डा बंद करने का फ़ैसला अंतिम | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
किरगिज़स्तान सरकार ने कहा है कि उसके यहाँ अमरीकी सैनिक अड्डे को बंद करने का निर्णय अंतिम है. इस सैनिक अड्डे से ही अफ़ग़ानिस्तान में तैनात नैटो सेनाओं को साज़ो-सामान की आपूर्ति होती है और यह सामरिक दृष्टि से अमरीका के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इससे पहले रूस सरकार ने किरगिज़स्तान सरकार को सहायता के तौर पर दो अरब डॉलर की राशि देने का वादा किया था. किरगिज़स्तान की संसद में इस अड्डे को बंद किए जाने के प्रस्ताव पर फ़रवरी के अंतिम सप्ताह में मतदान होगा. अमरीकी इस बीच ताजिकिस्तान ने कहा है कि वह अफ़ग़ानिस्तान में ग़ैर-सैनिक आपूर्ति ले जाने के लिए अपने वायु क्षेत्र का इस्तेमाल करने की इजाज़त देने को तैयार है. कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि किरगिज़स्तान में सैनिक अड्डा बंद हो जाने की स्थिति में आपात योजना के तौर पर अमरीका उज़बेकिस्तान के साथ समझौता होने के काफ़ी क़रीब है. अमरीका को मानवाधिकारों के मामले में विवाद खड़ा हो जाने के बाद वर्ष 2005 में उज़बेकिस्तान में अपना सैनिक अड्डा बंद करना पड़ा था. मनास का यह सैनिक अड्डा पूरे मध्य एशिया क्षेत्र में अमरीका का एक मात्र सैनिक अड्डा है और अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के सैन्य अभियानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि मनास से काबुल तक का हवाई रास्ता लगभग डेढ़ घंटे का है. मनास सैनिक अड्डे का इस्तेमाल अफ़ग़ानिस्तान जाने वाले विमानों में ईंधन भरने के लिए किया जाता है. इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि अफ़ग़ानिस्तान जाने वाले विमानों के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण पड़ाव है जो अफ़ग़ानिस्तान पहुँचने से पहले पड़ता है. इसी तरह अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले विमानों के लिए भी यह पहला पड़ाव है. बातचीत किरगिज़स्तान सरकार के प्रवक्ता आईबेक सुल्तानगाज़ीयेफ़ ने कहा है, "निर्णय कर लिया गया है. किरगिज़स्तान का विदेश मंत्रालय और अमरीकी दूतावास के बीच इस मुद्दे पर बातचीत हो रही है लेकिन सैनिक अड्डे को बरक़रार रखने के बारे में कोई बातचीत नहीं हो रही है."
किरगिज़स्तान के राष्ट्रपति कुरमनबेक बाकीयेफ़ ने फ़रवरी के प्रथम सप्ताह में रूस की यात्रा के दौरान मनास सैनिक अड्डे को बंद करने की योजना की घोषणा की थी. किरगिज़स्तान में रूस का भी एक सैनिक अड्डा है. रूस सरकार ने किरगिज़स्तान की आर्थिक मदद के लिए दो अरब डॉलर की राशि देने का वादा किया है लेकिन रूस ने इन ख़बरों का खंडन किया है कि मनास सैनिक अड्डे को बंद करने के फ़ैसले में उसका कोई हाथ है. मनास सैनिक अड्डे को बंद किए जाने का फ़ैसला अमरीका के लिए चौंकाने वाला है और यह ऐसे समय आया है जब अमरीका में राष्ट्रपति बराक ओबामा की नई सरकार ने हाल ही में कामकाज संभाला है. उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ाने की योजना की भी घोषणा की थी. विश्लेषकों का कहना है कि दूसरी तरफ़ रूस के लिए मनास में अमरीकी सैनिक अड्डा बंद होना महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत है क्योंकि रूस पूर्व सोवियत गणराज्यों पर अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए प्रयासरत है. रूस सरकार ने अफ़ग़ानिस्तान में नैटो सैनिकों की संख्या बढ़ाने को समर्थन दिया है लेकिन पूर्व सोवियत संघ के किसी हिस्से में अमरीका की सैनिक मौजूदगी पर सहमत नहीं हुआ है. मनास सैनिक अड्डे की स्थापना वर्ष 2001 में की गई थी जब अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन के ख़िलाफ़ अमरीकी नेतृत्व में विदेशी गठबंधन का हमला किया गया था. पट्टे की शर्तों के अनुसार अमरीका को मनास सैनिक अड्डा बंद करने के लिए छह महीने का नोटिस देना ज़रूरी है. | इससे जुड़ी ख़बरें आत्मघाती हमले में 21 पुलिसकर्मी मरे02 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ान राष्ट्रपति का चुनाव अगस्त में29 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस हमलों का उलटा असर होता है: पाकिस्तान28 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'अल क़ायदा जहाँ भी होगा, हमले होंगे'27 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस भारत-रूस में हुआ परमाणु समझौता05 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस रूस भारत की मदद के लिए तैयार04 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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