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भारत-फ्रांस के बीच परमाणु समझौता | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और फ्रांस के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं. भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और फ़्राँस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने पेरिस में मुलाकात की. इसके बाद हुई बैठक में फ़्राँस के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम के नारायणन और एटमिक एनर्जी कमिशन के प्रमुख अनिल काकोदकर भी शामिल थे. जब मैंने भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से पूछा कि क्या यही वो ऐतिहासिक समझौता है जो भारत के साथ परमाणु क्षेत्र में हो रहे भेदभाव या "न्यूक्लियर अपार्थेड" को समाप्त करेगा, तो उनका कहना था कि ये एक प्रक्रिया है जिसकी शुरुआत फ़्राँस ने की है लेकिन जल्द ही अमरीका, रूस और अन्य मित्र देशों के साथ हम ऐसे परमाणु समझौते करेंगे. ज़ाहिर है कि भारत अमरीका को नाराज़ नहीं करना चाहता है और न ही अमरीका के साथ होनेवाले परमाणु समझौते पर भारत फ़्राँस परमाणु समझौते की छाया पड़ने देना चाहता है. व्यावसायिक सौदे इस समझौते के साथ ही क्या राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर जो हरी झंडी दी जानी थी, वो भारत और फ़्राँस की सरकारों ने दे दी है? इसका जवाब देते हुए भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख डॉक्टर अनिल काकोदकर का कहना था कि ये ग्रीन सिग्नल हमें मिल गया है. अब भारत और फ़्राँस की कंपनियाँ मिलकर इस क्षेत्र में व्यावसायिक समझौतों की ओर बढ़ना शुरू कर सकती हैं. इसका सीधा मतलब ये हुआ कि फ़्राँस की कंपनियाँ अब भारत को परमाणु रिएक्टर दे सकती हैं. क्या बदलेगा? ऐसा माना जा रहा है कि इस समझौते से अब भारत के परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत कुछ बदल सकता है. इस समय भारत अपनी आधी बिजली कोयले से बनाता है जिससे काफ़ी प्रदूषण होता है. एक तिहाई से ज़्यादा बिजली तेल से बनती है जो प्रदूषण भी करती है और तेल के गिरते चढ़ते दामों से अर्थव्यवस्था भी डाँवाडोल होती है. फिलहाल भारत में सिर्फ़ एक प्रतिशत बिजली परमाणु ऊर्जा से पैदा होती है. दूसरी तरफ़ फ़्राँस अपनी 80% बिजली परमाणु ऊर्जा से पैदा करता है. भारत फ्रांस के इस मॉडल की तरफ़ धीरे धीरे बढ़ना चाहता है क्योंकि भारत का कहना है कि परमाणु ऊर्जा ग्रीन एनर्जी है जो पर्यावरण को नुक्सान नहीं पहुँचाती. भारत में इस समय 22 परमाणु संयंत्र यानि रिएक्टर हैं. रीप्रोसेसिंग दोनों देशों के बीच समझौता तो हो गया है लेकिन रीप्रोसेसिंग के विवादास्पद मुद्दे पर फ़्राँस ने भारत को तकनीक देने से मना कर दिया है. हालांकि भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रमुख अनिल काकोदकर ने कहा कि भारत के पास रीप्रोसेसिंग की टेक्नॉलोजी है और फ़्राँस जो परमाणु ईंधन दे रहा है उसको भारत रीप्रोसेस कर सकता है, जिस पर फ़्राँस को कोई आपत्ति नहीं है. |
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