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भारत-फ्रांस परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और फ्रांस के बीच परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं. भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पेरिस यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. भारत की ओर इस समझौते पर परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख डॉक्टर अनिल काकोदकर और फ्रांस की ओर से विदेश मंत्री बर्नार्ड कुशनेर ने हस्ताक्षर किए. इस समझौते के बाद फ्रांस की कंपनियाँ भारत को परमाणु ईंधन, उपकरणों और टेक्नॉलॉजी का निर्यात कर सकेंगी. बीबीसी एक विशेष बातचीत में इस समझौते के बारे में भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने कहा, "यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है, न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप की मंज़ूरी मिलने के बाद हम अन्य मित्र देशों के साथ ऐसे समझौते करेंगे." मित्र देशों से उनका आशय अमरीका से था, अमरीका की संसद की निचली सदन भारत-अमरीका समझौते के प्रारुप को पारित कर दिया है और अभी ऊपरी सदन सीनेट से मंज़ूरी मिलनी है, उसके बाद भारत और अमरीका के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. मेनन ने कहा, "हम रुस के साथ भी एक ऐसा ही समझौता करने पर विचार कर रहे हैं, अन्य देशों के के साथ भी ऐसे समझौते हो सकते हैं, उसके बाद भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में कोई बाधा नहीं आएगी." भारतीय विदेश सचिव ने बताया कि इसके बाद भारत और फ्रांस के बीच कंपनी स्तर पर बातचीत का रास्ता खुल गया है, उन्होंने कहा, "अब भारत का न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन लिमिटेड फ्रांस की कंपनियों से बातचीत और करार कर सकता है." बातचीत में शामिल हुए भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख डॉक्टर अनिल काकोदकर ने बीबीसी से विशेष बातचीत में कहा, "आज के समझौते के बाद हम परमाणु ऊर्जा का उत्पादन बढ़ा पाएँगे और भारत की ऊर्जा की ज़रूरतों को सही ढंग से पूरा कर सकेंगे." उन्होंने कहा, "ये तो शुरूआत है, इसके बाद बहुत काम करना होगा, व्यापारिक अनुबंधों पर काम शुरू होगा जिसमें काफ़ी गहन तरीक़े से चीज़ों को देखना होगा. " परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख और अग्रणी परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर काकोदकर ने आशा व्यक्त की कि अमरीका के साथ भी समझौता जल्दी ही हो जाएगा. |
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