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'परमाणु ऊर्जा का विकल्प मिलना चाहिए' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़्रांस में दो दिवसीय भारत-यूरोपीय संघ सम्मेलन शुरु हो गया है. भारतीय प्रधानमंत्री ने इस मौके पर यूरोपीय संघ के नेताओं से व्यापार और परमाणु समझौते समेत अन्य मुद्दों पर बातचीत की. फ़्रांस में ये चर्चा ज़ोरों पर है कि मंगलवार को फ़्रांस और भारत के बीच परमाणु समझौता हो सकता है. मनमोहन सिंह मंगलवार को फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी से मुलाक़ात करेंगे. सोमवार को मार्से में मनमोहन सिंह ने कहा, "परमाणु समझौते को लेकर मैने यूरोपीय नेताओं से बात की है. अमरीका से समझौते और एनएसजी से मिली मंज़ूरी पर भी बात हुई." निकोला सार्कोज़ी ने कहा कि आज भारत विश्व की एक बड़ी शक्ति है. भारत से परमाणु समझौते के बारे फ़्रांसीसी राष्ट्रपति का कहना था, "अगले 20-30 सालों में भारत की जनसंख्या और बढ़ेगी. ऐसे में अगर आप जलवायु परिवर्तन पर प्रगति की उम्मीद रखते हैं तो भारत को परमाणु ऊर्जा का विकल्प दिए बगैर आप वो कैसे कर सकते हैं." इस बात की काफ़ी उम्मीद जताई जा रही है कि जब मंगलवार को फ़्रांस और भारत के नेता मिलेंगे तो परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. इस साल के शुरु में सार्कोज़ी भारत की यात्रा पर आए थे और तभी इस समझौता का मूल प्रारुप तैयार किया गया था. सिख समुदाय और व्यापार का मसला भारत-यूरोपीय संघ सम्मेलन के दौरान मनमोहन सिंह ने यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोसे मैनुएल बरोसे से भी मुलाक़ात की जिसमें विश्व में चल रहे आर्थिक संकट पर भी चर्चा हुई. बरोसे ने कहा कि अमरीका के साथ मिलकर इसका हल निकालने की कोशिश करेंगे. वहीं फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने भारत में ईसाई धर्म के लोगों पर हो रहे हमलों का मुद्दा भी उठाया है. उन्होंने कहा कि भारत ने लोगों की सुरक्षा का आश्वास्न दिया है. एक पत्रकार ने जब ये सवाल पूछा कि क्या मनमोहन सिंह ने फ़्रांस में सिख लोगों का मुद्दा उठाया था तो सार्कोज़ी ने जवाब दिया, "सिख समुदाय के लोगों का फ़्रांस में स्वागत है. लेकिन फ्रांस के क़ानून सबके लिए बराबर हैं." क़ानून के तहत फ़्रांस के सरकारी दफ़्तरों और स्कूलों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी धर्म के प्रतीक चिन्ह पहनने या उनका प्रदर्शन करना मना है. इनमें सिखों की पगड़ी और मुसलमान लड़कियों के हिजाब को भी ऐसे ही प्रतिबंधित धार्मिक प्रतीक चिन्ह क़रार दिया गया है. सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार का मुद्दा भी उठा और तय किया गया कि अगले पाँच सालों में दोनों के बीच व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करना है. |
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