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जल दस्युओं के शहर में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोमालिया के समुद्र के पास पिछले दिनों एक भारतीय जलपोत का अपहरण कर लिया गया लेकिन इस इलाक़े के लिए यह कोई नई बात नहीं है. सोमालिया का इल बंदरगाह जलदस्युओं के कब्ज़े में है और अपह्त जहाज़ यहीं लाकर रखे जाते हैं. पुंटलैंड नामक इस इलाक़े मे जब कभी कोई नया जहाज़ अपह्त होता है तो फिर चहल पहल बढ़ जाती है. कुछ लोग टाई और सूट पहन कर लैपटॉप के साथ दिख जाते हैं. इन लोगों में से कोई खुद को जल दस्युओं का एकाउंटेंट बताता है तो कोई खुद को वार्ताकार. ख़बरों के मुताबिक अपह्त जहाज़ों के मालिकों या देशों से तीन लाख से दस लाख डॉलर तक की फ़िरौती ली जाती है. इस शहर में पिछले दिनों पहुंचे एक व्यक्ति बताते हैं कि किसी भी जहाज़ को अगवा करने वालों में कम लोग होते हैं लेकिन इस बाद की कार्रवाई में कई लोग शामिल होते हैं और ये किसी उद्योग की तरह काम करता है. वो कहते हैं, ' जहाज़ पर हमला तो सात आठ लोग ही करते हैं और जहाज़ को घेरते हैं लेकिन इसके बाद वार्ताकार, जहाज़ के लोगों को सुरक्षित रखने का काम, खाना पीना और तमाम तरह के तामझाम को चलाए रखने के लिए कई लोग जुड़े रहते हैं. ' अपह्त लोगों को खाना खिलाने के लिए विशेष रेस्तरां हैं. जल दस्यु अपह्त लोगों का अच्छा ख्याल रखते हैं क्योंकि उन्हें फिरौती लेनी होती है. इस इलाक़े की अर्थव्यवस्था मानो जहाज़ों के अपहरण से ही चलती है. हर आदमी किसी न किसी तरह इस उद्योग से जुड़ा हुआ है. कुछ दिनों पहले जब फ्रांस के सैनिकों ने दो फ्रांसीसी नाविकों को इल बंदरगाह के पास के समुद्र से छुड़ाया तो फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सारकोज़ी का कहना था कि मैंने इस अभियान की तुरंत अनुमति दी क्योंकि मुझे पता था कि एक बार हमारा जहाज़ इल बंदरगाह पहुंच जाए तो यह काम मुश्किल हो जाएगा. पुंटलैंड जल दस्युओं के लिए बिल्कुल सुरक्षित स्थान बन चुका है और उन्हें रोकने के लिए कोई क़दम नहीं उठाए जाते. कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि जल दस्यओं के साथ स्थानीय प्रशासन भी मिला हुआ है. कहा तो यह भी जाता है कि कई जल दस्यु सोमालिया के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला युसुफ़ के कबीले यानी मजारतीन से ही जुड़े हुए हैं. पुंटलैंड शहर शहर में पैसों की कोई कमी नहीं है. बड़े घर बन रहे हैं. लोगों के पास बड़ी गाड़ियां दिखती हैं. ये सब ऐसी स्थिति में जब देश में पिछले 20 साल से कोई कामचलाऊ सरकार तक नहीं है. पर्यवेक्षकों का कहना है कि पिछले साल पुंटलैंड के जल दस्युओं ने फिरौती में क़रीब तीन करोड़ डॉलर वसूले हैं. जब पुंटलैंड के प्रमुख अडे मूसा से जल दस्युओं के पास बहुत धन होने के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था कि इसमें कोई शक नहीं है. इन जल दस्युओं के पास आधुनिक हथियारों, स्पीड बोटों और पैसों की कोई कमी नहीं है. ये जल दस्यु अदन खाड़ी से गुजरने वाले उन जहाज़ों पर भी हमला करते हैं जो सोमालिया के अन्य नागरिकों के लिए मदद लेकर जा रहे होते हैं हालांकि फ्रांस, कनाडा और मलेशिया के जहाज़ सोमालिया समुद्र तट की देख रेख करते तो हैं लेकिन जल दस्युओं को पूरी तरह रोकना उनके बस में नहीं है. दुनिया के तेल व्यापार का 30 प्रतिशत हिस्सा इस खाड़ी से होकर गुज़रता है. जल दस्युओं के पास तेल टैंकरों से लदे जहाज़ को रोकने की तकनीक तो नहीं है लेकिन वो कई बार इन टैंकरों पर हमला कर चुके हैं. अंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम संगठन के एक अधिकारी कहते हैं कि वो दिन दूर नहीं जब कोई तेल टैंकर इन जल दस्युओं का निशाना बनेगा और तब जाकर दुनिया की निगाह इस बड़ी समस्या की ओर जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें सोमालिया की बिगड़ती स्थिति पर चिंता18 जून, 2006 | पहला पन्ना सोमालियाई तट पर अमरीकी नौसेना तैनात04 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना मोगादिशू में सरकारी सेना घुसी28 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना अमरीकी हमलों में अनेक हताहत09 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना सोमालिया में कई वर्षों से अस्थिरता15 मई, 2007 | पहला पन्ना जलदस्युओं के क़ब्ज़े में 18 भारतीय17 सितंबर, 2008 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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